हम स्वप्न देखनेवालों के समान थे
यात्रा का गीत।
126 1 जब हमारे परमपिता ने सिय्योन के बंधुओं को लौटा लाया, तब हम स्वप्न देखनेवालों के समान थे। 2 तब हमारे मुँह हँसी से भर गए, और हमारी जीभ जयजयकार से; तब जाति-जाति के लोगों में यह कहा जाने लगा, “यहोवा ने उनके लिए बड़े-बड़े काम किए हैं।” 3 हमारे परमपिता ने बड़े-बड़े काम किए हैं हमारे लिए; हम आनन्द से भर गए हैं।
4 हे हमारे परमपिता, नेगेव की जलधाराओं के समान हमारे बंधुओं को लौटा ला। a a v4 नेगेव इस्राएल का शुष्क दक्षिणी मरुस्थल है, जहाँ सूखे नाले वर्षा के बाद अचानक जल से भर जाते हैं — एक ही पल में बदल जानेवाले भाग्य का चित्र। 5 जो आँसुओं के साथ बोते हैं, वे जयजयकार के साथ लवनी करेंगे। 6 जो कोई रोता हुआ निकल जाता है, बीज की थैली लिए हुए बोने के लिए, वह निश्चय जयजयकार करता हुआ घर लौट आएगा, अपने अनाज के पूले लिए हुए।