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भजन संहिता 127

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जब तक वही न बनाए

आरोहण का गीत। सुलैमान का।

Chapter 127.

जब तक हमारे परमपिता घर न बनाएँ, तब तक उसके बनानेवाले व्यर्थ ही परिश्रम करते हैं। जब तक हमारे परमपिता नगर की रखवाली न करें, तब तक पहरुआ व्यर्थ ही जागता रहता है। व्यर्थ ही तुम सवेरे जल्दी उठते हो और देर तक जागते हो, और चिन्ता-भरे परिश्रम की रोटी खाते हो; क्योंकि वह अपने प्रिय जन को नींद देते हैं।

सन्तान हमारे परमपिता की ओर से मिली मीरास है, और गर्भ का फल उसका प्रतिफल है। जैसे वीर के हाथ में तीर होते हैं, वैसे ही जवानी की सन्तान होती है। धन्य है वह पुरुष जो अपना तरकश उनसे भर लेता है! वह लज्जित न होगा जब वह फाटक में अपने शत्रुओं से बातें करेगा। a a v5 नगर का फाटक वह सार्वजनिक सभा-स्थल था जहाँ कानूनी विवाद और समुदाय के मामले निपटाए जाते थे — अनेक पुत्रों का होना वहाँ अपने पक्ष में बलवन्त पैरोकारों का होना था।

A young man reading the Father's Heart Bible print edition in a coffee shop Now in Print

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