प्रधान बजानेवाले के लिये : शमीनीत पर। दाऊद का एक भजन।
12 1 हे हमारे परमपिता, बचा ले, क्योंकि भक्त लोग नहीं रहे; विश्वासयोग्य जन मनुष्यों की सन्तान में से लुप्त हो गए हैं। 2 हर एक अपने पड़ोसी से झूठ बोलता है; वे चापलूसी भरे होंठों और दुविधा से भरे मन से बातें करते हैं। 3 हमारे परमपिता सब चापलूसी भरे होंठों को काट डालें, और हर उस जीभ को जो बड़ी-बड़ी डींगें मारती है, 4 जो कहते हैं, “अपनी जीभ से हम प्रबल होंगे; हमारे होंठ हमारे अपने हैं — हम पर प्रभु कौन है?”
5 “दीन लोगों के लूटे जाने के कारण, दरिद्रों के कराहने के कारण, अब मैं उठूँगा,” हमारे परमपिता कहते हैं। “जो उद्धार के लिये तरसता है उसे मैं सुरक्षित स्थान में पहुँचाऊँगा।”
6 हमारे परमपिता के वचन शुद्ध वचन हैं, जैसे चाँदी भट्ठी में ताई गई हो मिट्टी की, और सात बार निर्मल की गई हो। 7 हे हमारे परमपिता, तू दरिद्रों को सुरक्षित रखेगा; तू हमें इस पीढ़ी से सदा के लिये बचाए रखेगा। 8 जब मनुष्यों की सन्तान में नीचता की प्रतिष्ठा होती है, तब दुष्ट लोग चारों ओर घूमते-फिरते हैं।