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भजन संहिता 11

Book

मेरा शरणस्थान

प्रधान बजानेवाले के लिये। दाऊद का भजन।

Chapter 11.

अपने परमपिता में मैंने शरण ली है। तुम कैसे कह सकते हो मेरे प्राण से, “पक्षी की नाईं अपने पहाड़ पर उड़ जा”? क्योंकि देखो — दुष्ट अपने धनुष चढ़ाते हैं; वे अपना तीर डोरी पर रखते हैं, कि अन्धियारे में से सीधे मनवालों पर चलाएँ। जब नींवें ढा दी जाती हैं, तब धर्मी क्या कर सकता है? हमारे परमपिता अपने पवित्र मन्दिर में हैं; हमारे परमपिता का सिंहासन स्वर्ग में है। उनकी आँखें देखती रहती हैं; उनकी दृष्टि मनुष्य की सन्तानों को परखती है। हमारे परमपिता धर्मी को परखते हैं, परन्तु उनका प्राण दुष्ट से घृणा करता है और उपद्रव के प्रेमी से। दुष्टों पर वे फन्दे बरसाएँगे — आग और गन्धक और झुलसाती लू उनके कटोरे का भाग होगी। क्योंकि हमारे परमपिता धर्मी हैं; वे धर्म के कामों से प्रेम रखते हैं। सीधे मनवाले उनका मुख देखेंगे। a a v7 यह भजन जिस सबसे गहरे प्रतिफल का नाम लेता है वह सुरक्षा नहीं, परन्तु हमारे परमपिता का मुख देखना है — सीधे मनवाले उन्हीं के हैं, और उनके संग रहना ही सब कुछ का सार है।

A young man reading the Father's Heart Bible print edition in a coffee shop Now in Print

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