कोरह के पुत्र
प्रधान बजानेवाले के लिये। कोरह के पुत्रों का एक भजन।
85 1 हे हमारे परमपिता, तूने अपने देश पर अनुग्रह किया; तूने याकूब को बंधुआई से लौटा लाया। 2 तूने अपनी प्रजा का अधर्म क्षमा किया; तूने उनके सारे पाप को ढाँप दिया। सेला। 3 तूने अपना सारा रोष हटा लिया; तू अपने भड़के हुए कोप से फिर गया।
4 हे हमारे परमपिता, हमारे उद्धार, हमें फिर से स्थिर कर; हम पर से अपना असंतोष दूर कर। 5 क्या तू हम पर सदा के लिये क्रोधित रहेगा? क्या तू अपना क्रोध पीढ़ी-पीढ़ी तक बनाए रखेगा? 6 क्या तू हमें फिर से जीवित न करेगा, कि तेरी प्रजा तुझ में आनन्दित हो? 7 हे हमारे परमपिता, हमें अपनी वाचा की करुणा दिखा, और हमें अपना उद्धार दे।
8 मैं सुनूँ कि हमारे परमपिता क्या कहते हैं, क्योंकि वे अपनी प्रजा से, अपने भक्तों से शान्ति की बात कहेंगे; पर वे अपनी मूर्खता की ओर फिर न लौटें। 9 निश्चय उसका उद्धार उन लोगों के निकट है जो उसका भय मानते हैं, कि हमारे देश में महिमा का वास हो। 10 वाचा की करुणा और सच्चाई आपस में मिल गई हैं; धार्मिकता और शान्ति ने आपस में चुम्बन किया है। 11 सच्चाई पृथ्वी में से उगती है, और धार्मिकता आकाश से झाँकती है। 12 हाँ, हमारे परमपिता जो उत्तम है वही देंगे, और हमारा देश अपनी उपज देगा। 13 धार्मिकता उसके आगे-आगे चलेगी और उसके पैरों के लिये मार्ग तैयार करेगी।