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भजन संहिता 64

Book

प्रधान गवैये के लिये। दाऊद का एक भजन।

Chapter 64.

हे मेरे पिता, मेरे विलाप में मेरी सुन ले; शत्रु के आतंक से मेरे प्राण की रक्षा कर। मुझे दुष्टों की गुप्त युक्ति से छिपा ले, कुकर्मियों की कोलाहल करती भीड़ से। वे अपनी जीभ तलवार के समान तेज करते हैं; वे अपने कड़वे वचनों को तीरों के समान ताकते हैं, कि घात में से खरे मनुष्य पर चलाएँ; वे अचानक और निडर होकर उस पर तीर छोड़ते हैं। वे अपने बुरे उद्देश्य पर दृढ़ रहते हैं; वे फंदे छिपाने की चर्चा करते हैं और कहते हैं, “उन्हें कौन देखेगा?”

वे अन्याय की युक्ति रचते हैं और कहते हैं, “हमने एक भली भाँति सोची-समझी योजना पूरी कर ली है।” मनुष्य के मन के भीतरी विचार और हृदय गहरे हैं। परन्तु हमारे परमपिता उन पर तीर चलाएँगे; अचानक वे घायल हो जाएँगे। वे ठोकर खिलाए जाते हैं; उनकी अपनी ही जीभ उनके विरुद्ध हो जाती है; जितने उन्हें देखेंगे, सब सिर हिलाएँगे।

तब सब मनुष्य डर जाएँगे; वे हमारे परमपिता के काम का प्रचार करेंगे और उसके किए हुए कामों पर ध्यान करेंगे। धर्मी हमारे परमपिता में आनन्दित हों और शरण लें उसमें; सब सीधे मनवाले जयजयकार करें!

A young man reading the Father's Heart Bible print edition in a coffee shop Now in Print

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