प्रधान बजानेवाले के लिये। दाऊद का भजन।
109 1 हे मेरी स्तुति के पिता, चुप न रह, 2 क्योंकि दुष्ट और छली मुखों ने मेरे विरुद्ध मुँह खोला है; वे झूठी जीभों से मेरे विरुद्ध बोलते हैं। 3 वे बैर के वचनों से मुझे घेर लेते हैं, और अकारण मुझ पर आक्रमण करते हैं। 4 मेरे प्रेम के बदले वे मुझ पर दोष लगाते हैं, परन्तु मैं तो प्रार्थना में लगा रहता हूँ। 5 वे भलाई के बदले मुझ से बुराई करते हैं, और मेरे प्रेम के बदले बैर।
6 उसके विरुद्ध किसी दुष्ट को ठहरा; और उसके दाहिने हाथ कोई दोष लगानेवाला खड़ा रहे। 7 जब उसका न्याय हो, तब वह दोषी ठहरे; और उसकी प्रार्थना पाप गिनी जाए। 8 उसके दिन थोड़े हों; और उसका पद कोई दूसरा ले ले। a a v8 पतरस ने इस पद को यहूदा इस्करियोती पर लागू किया, जब प्रेरितों ने उसके स्थान पर मत्तियाह को चुना — प्रेरितों के काम 1:20। 9 उसके बच्चे अनाथ हो जाएँ, और उसकी पत्नी विधवा। 10 उसके बच्चे मारे-मारे फिरें और भीख माँगें, अपने उजड़े घरों से निकाले जाकर। 11 महाजन उसका सब कुछ छीन ले; और परदेशी उसकी कमाई को लूट लें। 12 कोई न हो जो उस पर कृपा करे, और न कोई जो उसके अनाथ बच्चों पर तरस खाए। 13 उसके वंश का नाश हो जाए; और अगली पीढ़ी में उनका नाम मिटा दिया जाए। 14 उसके पुरखाओं का अधर्म हमारे परमपिता के सामने स्मरण किया जाए, और उसकी माता का पाप न मिटाया जाए। 15 उनके पाप निरन्तर हमारे परमपिता के सामने रहें, कि वह उनकी स्मृति को पृथ्वी पर से मिटा दे।
16 क्योंकि उसने कृपा करना स्मरण न रखा, वरन् दीन और दरिद्र और खेदित मन के मनुष्य के पीछे पड़ा रहा, कि उन्हें मार डाले। 17 उसने शाप देना प्रिय जाना; वह उसी पर लौट आए। उसने आशीष देने में कुछ प्रसन्नता न पाई; वह उससे दूर रहे। 18 उसने शाप को वस्त्र के समान पहन लिया; वह जल के समान उसके भीतर समा जाए, और तेल के समान उसकी हड्डियों में। 19 वह उसके लिये उस वस्त्र के समान हो जिसे वह ओढ़ता है, और उस कमरबन्द के समान जिसे वह निरन्तर बाँधे रहता है। 20 मेरे दोष लगानेवालों को यही बदला मिले, हमारे परमपिता की ओर से, और उनको भी जो मेरे प्राण के विरुद्ध बुरा बोलते हैं।
21 परन्तु हे प्रभु परमपिता, तू अपने नाम के निमित्त मुझ से भलाई कर; क्योंकि तेरी करुणा उत्तम है, मुझे छुड़ा ले। 22 क्योंकि मैं दीन और दरिद्र हूँ, और मेरा हृदय मेरे भीतर घायल है। 23 मैं संध्या की छाया के समान ढल जाता हूँ; मैं टिड्डी के समान झाड़ दिया जाता हूँ। 24 उपवास के कारण मेरे घुटने कमज़ोर हो गए हैं; और मेरी देह दुबली और क्षीण हो गई है। 25 मैं अपने दोष लगानेवालों के लिये निन्दा का कारण बन गया हूँ; वे मुझे देखकर अपना सिर हिलाते हैं।
26 हे मेरे पिता, मेरी सहायता कर; अपनी करुणा के अनुसार मुझे बचा, 27 वे जान लें कि यह तेरा ही हाथ है, कि हे मेरे पिता, तू ने ही यह किया है। 28 वे शाप दें, परन्तु तू आशीष देगा। जब वे उठ खड़े होंगे, तब लज्जित होंगे, परन्तु तेरा दास आनन्द करेगा। 29 मेरे दोष लगानेवाले अनादर से वस्त्र के समान ढके जाएँ; और अपनी लज्जा को चोगे के समान ओढ़ लें।
30 मैं अपने मुँह से हमारे परमपिता का बहुत धन्यवाद करूँगा; और भीड़ के बीच में उसकी स्तुति करूँगा। 31 क्योंकि वह दरिद्र के दाहिने हाथ खड़ा रहता है, कि उसके प्राण को दोषी ठहरानेवालों से उसे बचाए।