नापने की डोरी लिए एक पुरुष
2 1फिर मैंने आँखें उठाकर देखा, तो क्या देखता हूँ कि एक पुरुष के हाथ में नापने की डोरी है। 2मैंने पूछा, “तू कहाँ जा रहा है?” उसने मुझ से कहा, “यरूशलेम को नापने, कि देखूँ वह कितना चौड़ा और कितना लम्बा है।”
3तब वह दूत जो मुझ से बातें कर रहा था, चला गया, और दूसरा दूत उससे भेंट करने को निकला, 4और उससे कहा, “दौड़कर इस जवान से कह: ‘यरूशलेम बिना शहरपनाह के खुले देहात सा बसा रहेगा, क्योंकि उसमें बहुत से मनुष्य और पशु होंगे।’
5हमारे परमपिता की यह वाणी है, मैं आप ही उसके चारों ओर आग की शहरपनाह ठहरूँगा, और उसके बीच में उसकी महिमा ठहरूँगा।’”
6“हाय! हाय! उत्तर देश से भाग जाओ, हमारे परमपिता की यह वाणी है, क्योंकि मैंने तुम को आकाश की चारों वायुओं के समान तितर-बितर किया था, हमारे परमपिता की यह वाणी है। 7हे सिय्योन, हे बाबेल की पुत्री के संग रहनेवाली, बच निकल!
8क्योंकि स्वर्ग की सेनाओं के परमपिता यों कहते हैं—अपनी महिमा के निमित्त उसने मुझे उन जातियों के विरुद्ध भेजा है जिन्होंने तुम को लूटा था: क्योंकि जो तुम को छूता है, वह मानो उसकी आँख की पुतली को छूता है:
9क्योंकि देखो, मैं अपना हाथ उन पर हिलाऊँगा, और वे अपने ही दासों के लिये लूट ठहरेंगे। तब तुम जानोगे कि स्वर्ग की सेनाओं के परमपिता ने मुझे भेजा है।
10हे सिय्योन की पुत्री, जयजयकार कर और आनन्द मना! क्योंकि देखो, मैं आकर तेरे बीच में निवास करूँगा, हमारे परमपिता की यह वाणी है।
11“उस दिन बहुत सी जातियाँ हमारे परमपिता से मिल जाएँगी और मेरी सन्तान ठहरेंगी। मैं तेरे बीच में निवास करूँगा, और तू जान लेगी कि स्वर्ग की सेनाओं के परमपिता ने मुझे तेरे पास भेजा है। 12और हमारे परमपिता यहूदा को पवित्र देश में अपना भाग कर लेंगे, और यरूशलेम को फिर चुन लेंगे।
13हे सब प्राणियो, हमारे परमपिता के सामने चुप रहो, क्योंकि वे अपने पवित्र निवासस्थान से उठ खड़े हुए हैं।”