नाओमी की योजना
3 1तब उसकी सास नाओमी ने उससे कहा, “हे मेरी बेटी, क्या मैं तेरे लिये ऐसा घर न ढूँढूँ जिससे तेरा भला हो? 2क्या वह बोअज़, जिसकी दासियों के साथ तू रही, हमारा कुटुम्बी नहीं है? देख, वह आज रात खलिहान में जौ फटकेगा। 3तू स्नान करके सुगन्ध लगा, अपनी चादर ओढ़, और खलिहान को चली जा। जब तक वह पुरुष खा-पी न चुके, तब तक अपने आप को उस पर प्रगट न करना। 4जब वह लेट जाए, तब उस स्थान को ध्यान में रख जहाँ वह लेटा हो; फिर जाकर उसके पाँव उघाड़ कर लेट जाना—वह तुझे बता देगा कि तुझे क्या करना है।”
5रूत ने उससे कहा, “जो कुछ तू कहती है, वह सब मैं करूँगी।” 6अतः वह खलिहान को चली गई और जो कुछ उसकी सास ने उसे कहा था, वह सब उसने किया। 7बोअज़ खा-पीकर आनन्दित हुआ, तब अनाज के ढेर के छोर पर लेट गया। तब वह चुपके से आई, उसके पाँव उघाड़े और लेट गई। 8आधी रात को वह पुरुष चौंक उठा, करवट बदली, और क्या देखता है कि उसके पाँवों के पास एक स्त्री लेटी हुई है! 9उसने पूछा, “तू कौन है?” उसने कहा, “मैं तेरी दासी रूत हूँ। अपनी चादर का आँचल अपनी दासी पर फैला दे, क्योंकि तू छुड़ाने वाला कुटुम्बी है।” a a v9 किसी पर वस्त्र का आँचल फैलाना विवाह और संरक्षण का अनुरोध था।
10उसने कहा, “हे मेरी बेटी, तू हमारे परमपिता की ओर से धन्य हो। यह पिछली कृपा पहली से भी बढ़कर है, क्योंकि तूने न तो कंगाल और न धनी जवानों के पीछे भागी। 11अब हे मेरी बेटी, मत डर। जो कुछ तू कहेगी, वह सब मैं तेरे लिये करूँगा, क्योंकि मेरे नगर के सब लोग जानते हैं कि तू गुणवती स्त्री है। 12अब यह सच है कि मैं छुड़ाने वाला कुटुम्बी हूँ, तौभी मुझसे भी निकट एक और छुड़ाने वाला है। 13आज रात यहीं ठहर जा। सवेरे यदि वह तुझे छुड़ाना चाहे—तो अच्छा, वह छुड़ा ले। परन्तु यदि वह न चाहे, तो हमारे परमपिता के जीवन की शपथ, मैं ही तुझे छुड़ाऊँगा। भोर तक लेटी रह।”
14वह भोर तक उसके पाँवों के पास लेटी रही, और इससे पहले कि कोई किसी को पहचान सके वह उठ गई; क्योंकि उसने कहा था, “कोई यह न जानने पाए कि खलिहान में कोई स्त्री आई थी।” 15उसने कहा, “जो चादर तू ओढ़े है उसे ला और उसे फैला दे।” उसने उसे फैलाया। तब उसने छ: नाप जौ नापकर उस पर लाद दिया, और वह नगर में चला गया।
16जब रूत अपनी सास के पास आई, तो नाओमी ने पूछा, “हे मेरी बेटी, क्या हुआ?” तब उसने उसे वह सब बता दिया जो उस पुरुष ने उसके लिये किया था। 17उसने कहा, “उसने मुझे ये छ: नाप जौ यह कहकर दिए, ‘अपनी सास के पास खाली हाथ मत लौटना।’”
18नाओमी ने कहा, “हे मेरी बेटी, तब तक ठहरी रह जब तक तू न जान ले कि इसका क्या परिणाम होता है, क्योंकि वह पुरुष तब तक चैन न लेगा जब तक आज ही इस बात को निपटा न ले।”