पाप के लिए मरे हुए, परमपिता के लिए जीवित
6 1तो फिर हम क्या कहें? क्या हम पाप करते ही रहें, ताकि अनुग्रह बढ़ता जाए? 2कदापि नहीं! हम जो पाप के लिए मर गए, अब भी उसमें कैसे जीवित रहें? 3या क्या तुम नहीं जानते कि हम सब जिन्होंने मसीह यीशु में बपतिस्मा लिया, उसकी मृत्यु में बपतिस्मा लिया? 4इसलिए बपतिस्मे के द्वारा उसके साथ मृत्यु में गाड़े गए, ताकि जैसे मसीह हमारे परमपिता की महिमा के द्वारा मरे हुओं में से जिलाया गया, वैसे ही हम भी नये जीवन में चलें।
5क्योंकि यदि हम उसकी मृत्यु की समानता में उसके साथ जुड़ गए हैं, तो निश्चय ही उसके पुनरुत्थान में भी जुड़ेंगे। 6हम जानते हैं कि हमारा पुराना मनुष्यत्व उसके साथ क्रूस पर चढ़ाया गया, ताकि पाप का शरीर नष्ट हो जाए और हम आगे को पाप के दास न रहें। 7क्योंकि जो मर गया, वह पाप से छूटकर मुक्त हो गया है। 8अब यदि हम मसीह के साथ मर गए, तो हमें विश्वास है कि हम उसके साथ जीवित भी रहेंगे। 9क्योंकि हम जानते हैं कि मसीह जो मरे हुओं में से जिलाया गया, अब कभी नहीं मरता; मृत्यु का उस पर फिर अधिकार नहीं। 10क्योंकि जो मृत्यु उसने सही, वह पाप के लिए एक ही बार सदा के लिए मरा; परन्तु जो जीवन वह जीता है, वह हमारे परमपिता के लिए जीता है। 11इसी प्रकार तुम भी अपने आप को पाप के लिए मरा हुआ, परन्तु मसीह यीशु में हमारे परमपिता के लिए जीवित समझो।
12इसलिए पाप को अपने नाशवान शरीर में राज्य न करने दो कि तुम उसकी अभिलाषाओं के अधीन हो जाओ। 13अपने शरीर के अंगों को अधर्म के हथियार होने के लिए पाप को न सौंपो; बल्कि अपने आप को मरे हुओं में से जीवित हुए जानकर हमारे परमपिता को सौंपो, और अपने शरीर के अंगों को धार्मिकता के हथियार होने के लिए उसे सौंपो। 14क्योंकि पाप तुम पर प्रभुता न करेगा, इसलिए कि तुम व्यवस्था के अधीन नहीं, वरन् अनुग्रह के अधीन हो।
15तो फिर क्या? क्या हम इसलिए पाप करें कि हम व्यवस्था के अधीन नहीं, वरन् अनुग्रह के अधीन हैं? कदापि नहीं! 16क्या तुम नहीं जानते कि जिसकी आज्ञा मानने के लिए तुम अपने आप को दास के रूप में सौंपते हो, तुम उसी के दास होते हो जिसकी तुम आज्ञा मानते हो—चाहे पाप के, जिसका अन्त मृत्यु है, या आज्ञाकारिता के, जिसका अन्त धार्मिकता है? 17परन्तु हमारे परमपिता का धन्यवाद हो: तुम पाप के दास तो थे, परन्तु जिस उपदेश की रीति के अधीन तुम सौंपे गए, उसका मन से पालन किया। 18और पाप से छुड़ाए जाकर तुम धार्मिकता के दास बन गए।
19तुम्हारे शरीर की दुर्बलता के कारण मैं मनुष्यों की रीति पर कहता हूँ। जैसे तुमने अपने शरीर के अंगों को अशुद्धता और अधर्म के दास होने के लिए सौंपा था, जिससे और अधर्म होता गया, वैसे ही अब उन्हें धार्मिकता के दास होने के लिए सौंपो, जिससे पवित्रता होती जाए। 20क्योंकि जब तुम पाप के दास थे, तब धार्मिकता से स्वतंत्र थे। 21तो जिन बातों से अब तुम लज्जित होते हो, उनसे तब तुम्हें क्या लाभ मिला? क्योंकि उन बातों का अन्त तो मृत्यु है। 22परन्तु अब पाप से छुड़ाए जाकर और हमारे परमपिता के दास बनकर, तुम्हें वह फल मिलता है जो पवित्रता की ओर ले जाता है, और जिसका अन्त अनन्त जीवन है। 23क्योंकि पाप की मजदूरी मृत्यु है, परन्तु हमारे परमपिता का वरदान हमारे प्रभु मसीह यीशु में अनन्त जीवन है।