तुरन्त सहायता की पुकार
प्रधान बजानेवाले के लिये। दाऊद का स्मरण दिलाने के लिये।
70 1 हे मेरे परमपिता, मुझे छुड़ाने को फुर्ती कर! हे मेरे परमपिता, मेरी सहायता करने को फुर्ती कर! 2 जो मेरे प्राण के प्यासे हैं वे लज्जित और अपमानित हों; जो मेरी हानि से प्रसन्न होते हैं वे पीछे हटाए और निरादर किए जाएँ। 3 जो कहते हैं, “आहा! आहा!” वे अपनी लज्जा के कारण पीछे लौट जाएँ।
4 परन्तु वे सब जो तुझे ढूँढ़ते हैं तुझ में हर्षित और आनन्दित हों; जो तेरे उद्धार से प्रेम रखते हैं वे सदा कहें, “हमारे परमपिता महान हैं!” 5 परन्तु मैं दीन और दरिद्र हूँ; हे मेरे परमपिता, मेरे पास फुर्ती से आ! तू ही मेरा सहायक और मेरा छुड़ानेवाला है; हे मेरे परमपिता, विलम्ब न कर।