चिन्ता मत कर — भरोसा रख और प्रतीक्षा कर
दाऊद का भजन।
37 1 कुकर्मियों के कारण मत कुढ़, और जो कुटिलता करते हैं उनसे डाह न कर, 2 क्योंकि वे घास के समान शीघ्र ही मुरझा जाएँगे, और हरी घास के समान कुम्हला जाएँगे।
3 हमारे परमपिता पर भरोसा रख और भला कर; देश में बसा रह और सच्चाई का पालन कर। 4 हमारे परमपिता में मगन रह, और वह तेरे मन की अभिलाषाएँ पूरी करेगा।
5 अपना मार्ग हमारे परमपिता को सौंप दे; उस पर भरोसा रख, और वह पूरा करेगा। 6 वह तेरी धार्मिकता को ज्योति के समान, और तेरे न्याय को दोपहर के उजियाले के समान प्रगट करेगा।
7 हमारे परमपिता के सामने शान्त रह और धीरज से उसकी प्रतीक्षा कर; जो अपने मार्ग में सफल होता है, और जो दुष्ट युक्तियाँ रचता है, उसके कारण मत कुढ़।
8 क्रोध को छोड़ दे और जलजलाहट को त्याग दे; मत कुढ़—इससे केवल बुराई ही होती है। 9 क्योंकि कुकर्मी काट डाले जाएँगे, परन्तु जो हमारे परमपिता की बाट जोहते हैं, वे देश के अधिकारी होंगे।
10 अब थोड़ी ही देर है, और दुष्ट न रहेगा; यद्यपि तू उसके स्थान को ध्यान से देखे, तौभी वह न मिलेगा। 11 परन्तु नम्र लोग देश के अधिकारी होंगे और बड़ी शान्ति के कारण आनन्दित होंगे। a a v11 यीशु इस प्रतिज्ञा को अपने धन्य-वचनों में सम्मिलित करते हैं: “धन्य हैं वे जो नम्र हैं, क्योंकि वे पृथ्वी के अधिकारी होंगे” (मत्ती 5:5)।
12 दुष्ट धर्मी के विरुद्ध षड्यन्त्र रचता है और उस पर दाँत पीसता है; 13 परन्तु प्रभु परमपिता उस पर हँसता है, क्योंकि हमारे परमपिता देखता है कि दुष्ट का दिन आ रहा है।
14 दुष्ट तलवार खींचते हैं और अपना धनुष चढ़ाते हैं कि दीन और दरिद्र को गिरा दें, और सीधी चाल चलनेवालों को घात करें। 15 उनकी तलवार उन्हीं के हृदय में घुसेगी, और उनके धनुष तोड़ दिए जाएँगे।
16 धर्मी के पास जो थोड़ा है वह उत्तम है बहुत से दुष्टों की बहुतायत से भी; 17 क्योंकि दुष्टों का बल तोड़ा जाएगा, परन्तु हमारे परमपिता धर्मियों को सम्भालता है।
18 हमारे परमपिता निर्दोषों के दिनों को जानता है, और उनका भाग सदा बना रहेगा। 19 विपत्ति के समय वे लज्जित न होंगे; और अकाल के दिनों में वे तृप्त रहेंगे।
20 परन्तु दुष्ट नाश होंगे, और हमारे परमपिता के शत्रु मिट जाएँगे चरागाहों के फूलों के समान—वे धुएँ के समान लोप हो जाएँगे।
21 दुष्ट उधार लेता है और नहीं भरता, परन्तु धर्मी अनुग्रह करके देता है। 22 क्योंकि जिन्हें वह आशीष देता है वे देश के अधिकारी होंगे, परन्तु जिन्हें वह शाप देता है वे काट डाले जाएँगे।
23 मनुष्य के पग हमारे परमपिता की ओर से स्थिर होते हैं, और वह उसके मार्ग से प्रसन्न रहता है; 24 यद्यपि वह ठोकर खाए, तौभी वह गिर न पड़ेगा, क्योंकि हमारे परमपिता उसका हाथ थामे रहता है।
25 मैं जवान था, और अब बूढ़ा हो गया हूँ, तौभी मैंने न तो धर्मी को त्यागा हुआ, और न उसके वंश को भीख माँगते देखा। 26 वह तो दिन भर अनुग्रह करता और उधार देता रहता है, और उसका वंश आशीष का कारण होता है।
27 बुराई से हटकर भलाई कर, और तू सदा बना रहेगा। 28 क्योंकि हमारे परमपिता न्याय से प्रेम रखता है और अपने भक्तों को नहीं त्यागता; वे सदा सुरक्षित रहते हैं, परन्तु दुष्टों का वंश काट डाला जाएगा।
29 धर्मी लोग देश के अधिकारी होंगे और उस में सदा बसे रहेंगे।
30 धर्मी के मुख से बुद्धि की बातें निकलती हैं, और उसकी जीभ न्याय की बातें कहती है। 31 उसके पिता की शिक्षा उसके हृदय में रहती है; उसके पग नहीं फिसलते।
32 दुष्ट धर्मी की घात में लगा रहता है और उसे मार डालने का यत्न करता है; 33 परन्तु हमारे परमपिता उसे उसके हाथ में न छोड़ेगा, और न्याय के समय उसे दोषी न ठहरने देगा।
34 हमारे परमपिता की बाट जोह और उसके मार्ग पर बना रह, और वह तुझे बढ़ाकर देश का अधिकारी करेगा; जब दुष्ट काट डाले जाएँगे, तब तू देखेगा।
35 मैंने एक दुष्ट और क्रूर मनुष्य को देखा, जो हरे-भरे देशी वृक्ष के समान फैल रहा था; 36 परन्तु वह चला गया, और अचानक लोप हो गया; मैंने उसे ढूँढ़ा, परन्तु वह न मिला।
37 निर्दोष पर दृष्टि कर और सीधे मनुष्य को देख, क्योंकि शान्तिवाले मनुष्य का भविष्य होता है। 38 परन्तु अपराधी नाश किए जाएँगे सब के सब; दुष्टों का भविष्य मिटा दिया जाएगा।
39 धर्मियों का उद्धार हमारे परमपिता की ओर से होता है; संकट के समय वह उनका दृढ़ गढ़ है। 40 हमारे परमपिता उनकी सहायता करता है और उन्हें छुड़ाता है; वह उन्हें दुष्टों से छुड़ाकर बचाता है, क्योंकि वे उसकी शरण लेते हैं।