चखकर देखो
दाऊद का भजन; जब उसने अबीमेलेक के सामने पागल होने का ढोंग किया, और अबीमेलेक ने उसे निकाल दिया, तब वह चला गया।
34 1 मैं हर समय हमारे परमपिता को धन्य कहूँगा; उनकी स्तुति निरन्तर मेरे मुँह में रहेगी।
2 मेरा प्राण हमारे परमपिता पर घमण्ड करता है; दीन लोग यह सुनकर आनन्दित हों। 3 मेरे साथ हमारे परमपिता की महिमा करो; आओ, हम मिलकर उनके नाम को सराहें।
4 मैंने हमारे परमपिता को ढूँढ़ा, और उन्होंने मुझे उत्तर दिया; उन्होंने मुझे मेरे सब भयों से छुड़ाया। 5 जो उनकी ओर ताकते हैं वे उज्ज्वल हो जाते हैं; उनके मुख कभी लज्जित न होंगे। 6 इस दीन ने पुकारा, और हमारे परमपिता ने उसकी सुनी; उन्होंने उसे उसके सब संकटों से बचाया। 7 हमारे परमपिता का दूत उनका भय मानने वालों के चारों ओर छावनी डालता है, और उन्हें बचाता है।
8 चखकर देखो कि हमारे परमपिता भले हैं; धन्य है वह जन जो उनकी शरण लेता है। 9 हे उनके पवित्र लोगो, हमारे परमपिता का भय मानो, क्योंकि उनका भय मानने वालों को किसी बात की घटी नहीं होती। 10 जवान सिंह भूखे रहते और घटी में पड़ते हैं, परन्तु जो हमारे परमपिता को ढूँढ़ते हैं उन्हें किसी अच्छी वस्तु की घटी नहीं होती।
11 हे बच्चो, आओ, मेरी सुनो; मैं तुम्हें हमारे परमपिता का भय मानना सिखाऊँगा। 12 कौन है वह मनुष्य जो जीवन चाहता और बहुत से भले दिनों से प्रेम रखता है? 13 अपनी जीभ को बुराई से रोक रख, और अपने होंठों को छल की बातें कहने से। 14 बुराई से मुड़ और भलाई कर; शान्ति को ढूँढ़ और उसी के पीछे लगा रह।
15 हमारे परमपिता की आँखें धर्मियों पर लगी रहती हैं, और उनके कान उनकी दुहाई की ओर खुले रहते हैं। 16 हमारे परमपिता का मुख कुकर्मियों के विरुद्ध रहता है, कि उनका स्मरण पृथ्वी पर से मिटा दें। 17 धर्मी पुकारते हैं, और हमारे परमपिता सुनते हैं; वे उन्हें उनके सब संकटों से छुड़ाते हैं। 18 हमारे परमपिता टूटे मन वालों के निकट रहते हैं; वे उन्हें बचाते हैं जिनकी आत्मा कुचली हुई है।
19 धर्मी पर बहुत सी विपत्तियाँ आती हैं, परन्तु हमारे परमपिता उसे उन सब से छुड़ाते हैं। 20 हमारे परमपिता धर्मी की सब हड्डियों की रक्षा करते हैं; उनमें से एक भी नहीं तोड़ी जाती।
21 बुराई दुष्ट को मार डालेगी, और जो धर्मी से बैर रखते हैं वे दोषी ठहरेंगे। 22 हमारे परमपिता अपने दासों के प्राण को छुड़ा लेते हैं; जो उनकी शरण लेते हैं उनमें से कोई दोषी न ठहरेगा।