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भजन संहिता 115

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महिमा तेरी ही है

Chapter 115.

हे हमारे परमपिता, हमारी नहीं, हमारी नहीं, परन्तु तेरे ही नाम को महिमा दे, तेरी वाचा की करुणा और तेरी सच्चाई के कारण।

जाति-जाति के लोग क्यों कहें, “अब उनका परमेश्वर कहाँ है?” हमारे परमपिता स्वर्ग में हैं; वे जो कुछ चाहते हैं वही करते हैं। उनकी मूरतें चाँदी और सोने की हैं, मनुष्यों के हाथों की कारीगरी हैं। उनके मुँह तो हैं, पर वे बोल नहीं सकतीं; आँखें हैं, पर देख नहीं सकतीं; उनके कान हैं, पर वे सुन नहीं सकतीं; नाक हैं, पर सूँघ नहीं सकतीं; उनके हाथ हैं, पर वे छू नहीं सकतीं; पाँव हैं, पर चल नहीं सकतीं; और उनके गले से कोई आवाज़ नहीं निकलती। जो उन्हें बनाते हैं वे उन्हीं के समान हो जाते हैं, और हर एक भी जो उन पर भरोसा रखता है।

हे इस्राएल, हमारे परमपिता पर भरोसा रख! वे ही उनका सहायक और उनकी ढाल हैं। हे हारून के घराने, हमारे परमपिता पर भरोसा रख! वे ही उनका सहायक और उनकी ढाल हैं। हे हमारे परमपिता का भय माननेवालो, उन पर भरोसा रखो! वे ही उनका सहायक और उनकी ढाल हैं।

हमारे परमपिता ने हमें स्मरण किया है; वे हमें आशीष देंगे। वे इस्राएल के घराने को आशीष देंगे; वे हारून के घराने को आशीष देंगे; वे हमारे परमपिता का भय माननेवालों को आशीष देंगे, छोटे और बड़े दोनों को।

हमारे परमपिता तुम्हें अधिक से अधिक बढ़ाएँ, तुम्हें और तुम्हारी सन्तान को। हमारे परमपिता की ओर से तुम पर आशीष हो, जो आकाश और पृथ्वी के रचनेवाले हैं।

आकाश तो हमारे परमपिता का ही है, परन्तु पृथ्वी उन्होंने मनुष्यों को दे दी है। मरे हुए हमारे परमपिता की स्तुति नहीं करते, और न वे जो सन्नाटे में उतर जाते हैं। परन्तु हम तो अब से लेकर सदा सर्वदा तक हमारे परमपिता को धन्य कहते रहेंगे। हल्लिलूयाह!

A young man reading the Father's Heart Bible print edition in a coffee shop Now in Print

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