हल्लेलूयाह
111 1 हल्लेलूयाह! मैं अपने सारे मन से हमारे परमपिता की स्तुति करूँगा, सीधे लोगों की संगति में और मण्डली में। 2 हमारे परमपिता के काम महान हैं, जो उनसे प्रसन्न होते हैं वे सब उन पर ध्यान लगाते हैं। 3 उनके काम में तेज और प्रताप है, और उनकी धार्मिकता सदा बनी रहती है। 4 उन्होंने अपने अद्भुत कामों को स्मरणीय बनाया है; हमारे परमपिता अनुग्रहकारी हैं, उनका हृदय दया से भरा है। 5 वे अपने डरवैयों को भोजन देते हैं; वे अपनी वाचा को सदा स्मरण रखते हैं। 6 उन्होंने अपनी प्रजा को अपने कामों का सामर्थ्य दिखाया, और उन्हें जातियों का भाग सौंप दिया। 7 उनके हाथों के काम विश्वासयोग्य और न्यायपूर्ण हैं; उनके सब उपदेश भरोसेमन्द हैं। 8 वे युगानुयुग स्थिर रहते हैं, और सच्चाई और खराई के साथ पूरे किए जाते हैं। 9 उन्होंने अपनी प्रजा के लिए छुटकारा भेजा; उन्होंने अपनी वाचा को सदा के लिए ठहराया। उनका नाम पवित्र और भययोग्य है। 10 हमारे परमपिता का भय बुद्धि का आरम्भ है; जो इस पर चलते हैं वे सब उत्तम समझ पाते हैं। उनकी स्तुति सदा बनी रहती है। a a v10 यहाँ भय का अर्थ श्रद्धामय विस्मय और गहरा आदर है, न कि आतंक या भयभीति।