हमारे परमपिता उसके कदमों को स्थिर करते हैं
16 1मन की योजनाएँ मनुष्य की हैं, परन्तु जीभ का उत्तर हमारे परमपिता की ओर से आता है। 2मनुष्य के सारे मार्ग उसकी अपनी दृष्टि में शुद्ध हैं, परन्तु हमारे परमपिता मन के इरादों को तौलते हैं। 3अपने कामों को हमारे परमपिता को सौंप दे, और तेरी योजनाएँ स्थिर होंगी। 4हमारे परमपिता ने हर वस्तु को उसके प्रयोजन के लिए बनाया है, यहाँ तक कि दुष्ट को भी विपत्ति के दिन के लिए। 5हर घमण्डी मनवाला हमारे परमपिता के लिए घृणित है; निश्चय जान, वह बिना दण्ड के न छूटेगा। 6करुणा और सच्चाई से पाप का प्रायश्चित होता है, और हमारे परमपिता का भय मनुष्य को बुराई से दूर कर देता है। 7जब मनुष्य के मार्ग हमारे परमपिता को भाते हैं, तब हमारे परमपिता उसके शत्रुओं को भी उससे मेल-मिलाप में रख देते हैं। 8धार्मिकता के साथ थोड़ा ही उत्तम है अन्याय के साथ बड़ी आय से। 9मनुष्य का मन अपने मार्ग की योजना बनाता है, परन्तु हमारे परमपिता उसके कदमों को स्थिर करते हैं। 10राजा के होठों पर ईश्वरीय निर्णय होता है; न्याय करने में उसका मुख विश्वासघात नहीं करता। 11सच्चे तराजू और काँटे हमारे परमपिता के हैं; बटखरे और नाप सब उसी के काम हैं। 12राजाओं के लिए घृणित है दुष्टता करना, क्योंकि सिंहासन धार्मिकता ही से स्थिर होता है। 13धर्मी होंठ आनन्द हैं राजाओं का, और वे उससे प्रेम रखते हैं जो सीधी बात कहता है। 14राजा का क्रोध मृत्यु का दूत है, परन्तु बुद्धिमान मनुष्य उसे शान्त कर लेगा। 15राजा के मुख के प्रकाश में जीवन है, और उसकी कृपा बरसात लानेवाले बादल के समान है। 16बुद्धि प्राप्त करना सोने से कहीं उत्तम है! समझ प्राप्त करना चाँदी से बढ़कर मूल्यवान है। 17सीधे लोगों का राजमार्ग बुराई से दूर हट जाता है; जो अपने मार्ग की रक्षा करता है, वह अपने प्राण की रक्षा करता है। 18विनाश से पहले घमण्ड आता है, और गिरने से पहले घमण्डी आत्मा। 19घमण्डियों के साथ लूट का माल बाँटने से, दीनों के बीच नम्र आत्मावाला होना उत्तम है। 20जो वचन पर ध्यान देता है, वह भलाई पाता है, और धन्य है वह जो हमारे परमपिता पर भरोसा रखता है। 21बुद्धिमान मनवाला समझदार कहलाता है, और मधुर वाणी समझाने की शक्ति को बढ़ाती है। 22जिसके पास समझ है, उसके लिए वह जीवन का सोता है, परन्तु मूर्खों को उनकी अपनी मूर्खता ही ताड़ना देती है। 23बुद्धिमान का मन उसकी वाणी को बुद्धिमान बनाता है, और उसके होठों में समझाने की शक्ति को बढ़ाता है। 24मधुर वचन मधु के छत्ते के समान हैं, प्राण के लिए मीठे और हड्डियों के लिए चंगाई हैं। 25एक ऐसा मार्ग है जो मनुष्य को सीधा जान पड़ता है, परन्तु उसका अन्त मृत्यु का मार्ग है। 26परिश्रमी की भूख काम करती है उसके लिए; उसकी भूख उसे आगे बढ़ाती रहती है। 27नीच मनुष्य बुराई खोद निकालता है, और उसके होठों पर मानो झुलसानेवाली आग है। 28टेढ़ा मनुष्य झगड़ा फैलाता है, और कानाफूसी करनेवाला घनिष्ठ मित्रों में फूट डालता है। 29उपद्रवी मनुष्य अपने पड़ोसी को फुसलाता है, और उसे हानिकारक मार्ग पर ले जाता है। 30जो आँख मारता है, वह टेढ़ी बातें रचता है; जो अपने होंठ भींचता है, वह बुराई पर तुला रहता है। 31पके बाल शोभा का मुकुट हैं; यह धार्मिकता के मार्ग में प्राप्त होता है। 32धीरजवन्त मनुष्य वीर से उत्तम है, और जो अपनी आत्मा को वश में रखता है, वह नगर के जीतनेवाले से उत्तम है। 33चिट्ठी गोद में डाली जाती है, परन्तु उसका हर निर्णय हमारे परमपिता की ओर से होता है।