परमपिता कुड़कुड़ाहट को शांत करते हैं
17 1तब हमारे परमपिता ने मूसा से कहा:
2“हारून याजक के पुत्र एलीआजर से कह कि वह जलते हुए कोयलों में से धूपदानों को उठा ले, और आग को दूर बिखेर दे—क्योंकि वे पवित्र हैं। 3उन मनुष्यों के धूपदान जिन्होंने अपने प्राणों की हानि करके पाप किया। उन्हें पीटकर पत्तर बना दे, ताकि वेदी को ढाँपा जाए—क्योंकि वे मेरे सम्मुख अर्पित किए गए और पवित्र हो गए—और वे इस्राएलियों के लिये एक चिन्ह ठहरें।”
4तब एलीआजर याजक ने उन पीतल के धूपदानों को लिया जिन्हें जलाए गए मनुष्यों ने अर्पित किया था, और उन्हें पीटकर वेदी का आवरण बनाया। 5यह इस्राएलियों के लिये एक स्मरण था कि कोई पराया मनुष्य—जो हारून के वंश का न हो—हमारे परमपिता के सम्मुख धूप जलाने के लिये समीप न आए, ऐसा न हो कि वह कोरह और उसकी मंडली के समान हो जाए, जैसा हमारे परमपिता ने मूसा के द्वारा हारून से कहा था।
6दूसरे दिन इस्राएलियों की सारी मंडली मूसा और हारून पर कुड़कुड़ाने लगी: “तुम ने हमारे परमपिता के लोगों को मार डाला है।” 7जब मंडली मूसा और हारून के विरुद्ध इकट्ठी हुई, तब उन्होंने मिलापवाले तम्बू की ओर दृष्टि की, और बादल ने तम्बू को ढाँप लिया, और हमारे परमपिता का तेज दिखाई दिया।
8तब मूसा और हारून मिलापवाले तम्बू के सामने आए। 9और हमारे परमपिता ने मूसा से कहा:
10“इस मंडली के बीच में से हट जाओ, कि मैं उन्हें पल भर में भस्म कर दूँ।” तब वे मुँह के बल गिर पड़े।
11मूसा ने हारून से कहा, “धूपदान को लेकर उस में वेदी पर से आग रख, और उस पर धूप डाल, और शीघ्र मंडली के पास ले जाकर उनके लिये प्रायश्चित कर; क्योंकि हमारे परमपिता के सम्मुख से कोप निकल पड़ा है; मरी आरम्भ हो गई है।”
12मूसा के कहने के अनुसार हारून ने धूपदान लिया, और मंडली के बीच में दौड़ गया—मरी लोगों में आरम्भ हो चुकी थी—और उसने धूप जलाकर लोगों के लिये प्रायश्चित किया। 13और वह मुर्दों और जीवितों के बीच में खड़ा हुआ, तब मरी थम गई। a a v13 हारून का मुर्दों और जीवितों के बीच खड़े होकर मरी को रोकना यीशु का पूर्वाभास है, जो एकमात्र मध्यस्थ हैं, जो हमारे परमपिता के न्याय और उसके लोगों के बीच खड़े होकर अपने ही प्राण देकर प्रायश्चित करते हैं। 14जो मरी से मर गए उनकी गिनती चौदह हजार सात सौ थी, उन को छोड़कर जो कोरह के कारण मर गए थे। 15तब हारून मिलापवाले तम्बू के द्वार पर मूसा के पास लौट आया, क्योंकि मरी थम गई थी। 16तब हमारे परमपिता ने मूसा से कहा:
17“इस्राएलियों से कह, और उनसे उनके पितरों के घरानों के अनुसार एक-एक छड़ी ले—अर्थात उनके सब प्रधानों से उनके पितरों के घरानों के अनुसार बारह छड़ियाँ। हर एक मनुष्य का नाम उसकी छड़ी पर लिख। 18और लेवी की छड़ी पर हारून का नाम लिख, क्योंकि उनके पितरों के घरानों के हर एक मुख्य पुरुष के लिये एक-एक छड़ी हो। 19और उन्हें मिलापवाले तम्बू में साक्षीपत्र के सामने रख, जहाँ मैं तुम से मिला करता हूँ। b b v19 साक्षीपत्र से तात्पर्य व्यवस्था की उन पत्थर की पटियाओं से है जो निवासस्थान में सन्दूक के भीतर रखी गई थीं। 20जिस मनुष्य को मैं चुन लूँगा उसी की छड़ी में कलियाँ फूटेंगी; और इस प्रकार मैं इस्राएलियों की उस कुड़कुड़ाहट को, जो वे तुम पर कुड़कुड़ाते हैं, अपने सम्मुख से शान्त कर दूँगा।”
21तब मूसा ने इस्राएलियों से यह बात कही, और उनके सब प्रधानों ने उसे एक-एक छड़ी दी—अर्थात हर एक प्रधान से उनके पितरों के घराने के अनुसार एक-एक, कुल बारह छड़ियाँ—और उन छड़ियों में हारून की छड़ी भी थी। 22और मूसा ने उन छड़ियों को साक्षी के तम्बू में हमारे परमपिता के सम्मुख रख दिया। 23दूसरे दिन मूसा साक्षी के तम्बू में गया, तो क्या देखा कि हारून की छड़ी, जो लेवी के घराने के लिये थी, उस में कलियाँ फूट निकली थीं—अर्थात उस में कलियाँ लगीं, फूल खिले, और पके हुए बादाम भी लगे थे। c c v23 इब्रानियों ९:४ में सन्दूक में रखी गई हारून की उस छड़ी का स्मरण किया गया है जिस में कलियाँ फूटी थीं। मरी हुई लकड़ी में से जीवन का फूटना हमारे परमपिता के चुने हुए याजक की पुष्टि करता है, और आगे यीशु की ओर संकेत करता है, जिनके याजकपद को हमारे परमपिता ने उन्हें मरे हुओं में से जिलाकर सिद्ध ठहराया। 24तब मूसा उन सब छड़ियों को हमारे परमपिता के सम्मुख से निकालकर सब इस्राएलियों के पास ले आया; और उन्होंने देखा, और अपनी-अपनी छड़ी ले ली।
25और हमारे परमपिता ने मूसा से कहा, “हारून की छड़ी को साक्षीपत्र के सामने फिर रख दे, कि वह बलवा करनेवालों के लिये एक चिन्ह होकर रखी रहे, ताकि तू उनका मुझ पर कुड़कुड़ाना दूर करे, और वे न मरें।”
26और मूसा ने ऐसा ही किया; जैसा हमारे परमपिता ने उसे आज्ञा दी थी, ठीक वैसा ही उसने किया। 27तब इस्राएलियों ने मूसा से कहा, “देख, हम मरते हैं, हम नाश होते हैं, हम सब के सब नाश होते हैं! 28जो कोई समीप जाता है, जो कोई हमारे परमपिता के निवासस्थान के समीप जाता है, वह मर जाता है। क्या हम सब के सब नाश हो जाएँगे?”