परमपिता मार्ग तैयार करते हैं
3 1उन दिनों यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला आया, और यहूदिया के जंगल में यह प्रचार करने लगा, 2“मन फिराओ, क्योंकि हमारे पिता का राज्य निकट आ गया है।” 3यह वही है जिसके विषय में यशायाह भविष्यद्वक्ता ने कहा था: “जंगल में एक पुकारनेवाले का शब्द: प्रभु का मार्ग तैयार करो, उसके रास्ते सीधे करो।”
4यूहन्ना ऊँट के रोम का वस्त्र पहने और अपनी कमर में चमड़े का पटुका बाँधे रहता था; उसका भोजन टिड्डियाँ और जंगली मधु था। 5तब यरूशलेम और सारा यहूदिया और यरदन के आस-पास का सारा प्रदेश उसके पास निकल आया, 6और उन्होंने अपने पापों को मानकर यरदन नदी में उससे बपतिस्मा लिया।
7जब उसने बहुत से फरीसियों और सदूकियों को बपतिस्मा लेने के लिए आते देखा, तो उनसे कहा, “हे साँपों के बच्चो! तुम्हें किसने चेतावनी दी कि आनेवाले प्रकोप से भागो? 8इसलिए मन फिराव के योग्य फल लाओ। 9और अपने मन में यह कहने का साहस न करो कि ‘अब्राहम हमारा पिता है,’ क्योंकि मैं तुम से कहता हूँ कि हमारे परमपिता इन पत्थरों से अब्राहम के लिए सन्तान उत्पन्न कर सकते हैं। 10अब तो कुल्हाड़ा पेड़ों की जड़ पर रखा हुआ है; इसलिए जो-जो पेड़ अच्छा फल नहीं लाता, वह काटा और आग में झोंका जाता है।
11“मैं तो तुम्हें मन फिराव के लिए पानी से बपतिस्मा देता हूँ, परन्तु जो मेरे बाद आ रहा है वह मुझ से शक्तिशाली है—मैं तो उसकी जूतियाँ उठाने के योग्य भी नहीं। वह तुम्हें पवित्र आत्मा और आग से बपतिस्मा देगा। 12उसका सूप उसके हाथ में है; वह अपना खलिहान अच्छी तरह साफ करेगा, और अपने गेहूँ को खत्ते में इकट्ठा करेगा, परन्तु भूसी को उस आग में जलाएगा जो कभी बुझती नहीं।” a a v12 सूप का प्रयोग दाँवे हुए अनाज को हवा में उड़ाने के लिए किया जाता था; भारी गेहूँ भूमि पर वापस गिर जाता था जबकि हलकी भूसी उड़ जाती थी।
परमपिता अपने पुत्र का स्वागत करते हैं
13उस समय यीशु गलील से यरदन के किनारे यूहन्ना के पास उससे बपतिस्मा लेने आया। 14परन्तु यूहन्ना उसे रोकने लगा और कहा, “मुझे तो तुझ से बपतिस्मा लेने की आवश्यकता है, और तू मेरे पास आया है?”
15यीशु ने उसे उत्तर दिया, “अभी तो ऐसा ही होने दे, क्योंकि हमें इसी रीति से सारी धार्मिकता को पूरा करना उचित है।” तब उसने उसकी बात मान ली।
16बपतिस्मा लेने के बाद यीशु तुरन्त पानी में से ऊपर आया, और अचानक उसके लिए आकाश खुल गया; उसने हमारे पिता के आत्मा को कबूतर के समान उतरते और अपने ऊपर बैठते देखा।
17तब आकाश से यह शब्द हुआ, “यह मेरा पुत्र है, जिससे मैं प्रेम करता हूँ; मैं उससे प्रसन्न हूँ।”