परमपिता अपनी वाणी भेजते हैं
3 1तिबिरियुस कैसर के राज्य के पंद्रहवें वर्ष में, जब पुन्तियुस पीलातुस यहूदिया का राज्यपाल था, हेरोदेस गलील का चौथाई देश का राजा था, उसका भाई फिलिप्पुस इतूरैया और त्रखोनीतिस प्रदेश का, और लुसानियास अबिलेने का, 2हन्ना और कैफा के महायाजक रहते, जंगल में जकर्याह के पुत्र यूहन्ना के पास हमारे परमपिता का वचन पहुँचा। 3और वह यरदन के आस-पास के सारे प्रदेश में आकर पापों की क्षमा के लिए मन-फिराव के बपतिस्मा का प्रचार करने लगा, 4जैसा यशायाह भविष्यद्वक्ता के वचनों की पुस्तक में लिखा है: “जंगल में एक पुकारनेवाले का शब्द: प्रभु का मार्ग तैयार करो, उसकी सड़कों को सीधा करो। 5हर एक घाटी भर दी जाएगी, और हर एक पहाड़ और टीला नीचा किया जाएगा। टेढ़े मार्ग सीधे हो जाएँगे, और ऊबड़-खाबड़ रास्ते चौरस हो जाएँगे, 6और हर एक प्राणी हमारे परमपिता के उद्धार को देखेगा।”
7फिर जो भीड़ उससे बपतिस्मा लेने आ रही थी, उनसे यूहन्ना ने कहा, “हे साँपों के बच्चो! तुम्हें किसने चेतावनी दी कि आनेवाले क्रोध से भागो? 8इसलिए मन-फिराव के योग्य फल लाओ, और अपने-आप से यह कहना न शुरू करो कि ‘हमारा पिता तो अब्राहम है।’ क्योंकि मैं तुमसे कहता हूँ कि हमारे परमपिता इन पत्थरों से अब्राहम के लिए सन्तान उत्पन्न कर सकते हैं। 9अभी तो पेड़ों की जड़ पर कुल्हाड़ी रखी हुई है; जो-जो पेड़ अच्छा फल नहीं लाता, वह काटा और आग में झोंका जाता है।”
10तब भीड़ के लोगों ने उससे पूछा, “तो हम क्या करें?”
11उसने उत्तर दिया, “जिसके पास दो कुरते हों, वह उसे बाँट दे जिसके पास एक भी नहीं; और जिसके पास भोजन हो, वह भी ऐसा ही करे।”
12चुंगी लेनेवाले भी बपतिस्मा लेने आए, और उससे पूछा, “हे गुरु, हम क्या करें?”
13उसने उनसे कहा, “जितना तुम्हारे लिए ठहराया गया है, उससे अधिक न वसूलो।”
14सिपाहियों ने भी उससे पूछा, “और हम क्या करें?” उसने उनसे कहा, “किसी पर बल-प्रयोग या झूठे दोष लगाकर धन न ऐंठो; अपनी मजदूरी में सन्तुष्ट रहो।”
15लोग आस लगाए हुए थे और सब अपने-अपने मन में यूहन्ना के विषय में सोच रहे थे कि कहीं यही मसीह तो नहीं। 16यूहन्ना ने उन सबको उत्तर दिया, “मैं तो तुम्हें पानी से बपतिस्मा देता हूँ, परन्तु मुझसे शक्तिशाली एक आ रहा है, जिसकी जूती का बन्ध खोलने के भी मैं योग्य नहीं। वह तुम्हें पवित्र आत्मा और आग से बपतिस्मा देगा। 17उसका सूप उसके हाथ में है, और वह अपना खलिहान अच्छी तरह साफ करेगा, और गेहूँ को अपने खत्ते में इकट्ठा करेगा, परन्तु भूसी को उस आग में जलाएगा जो कभी बुझती नहीं।”
18और भी बहुत-सी बातों से समझाते हुए यूहन्ना लोगों को सुसमाचार सुनाता रहा। 19परन्तु यूहन्ना ने चौथाई देश के राजा हेरोदेस को उसके भाई की पत्नी हेरोदियास के विषय में, और उन सब बुराइयों के विषय में जो हेरोदेस ने की थीं, डाँटा, 20तब हेरोदेस ने उन सब पर यह और भी बढ़ाया: उसने यूहन्ना को बन्दीगृह में डाल दिया।
परमपिता अपने पुत्र को प्रिय कहते हैं
21जब सब लोग बपतिस्मा ले चुके, तो यीशु ने भी बपतिस्मा लिया। और जब वह प्रार्थना कर रहा था, तो आकाश खुल गया,
22और पवित्र आत्मा शारीरिक रूप में कबूतर के समान उस पर उतरा। और आकाश से यह शब्द हुआ, “तू मेरा प्रिय पुत्र है; तुझसे मैं प्रसन्न हूँ।”
23जब यीशु ने अपनी सेवा आरम्भ की, तब वह लगभग तीस वर्ष का था। वह (जैसा समझा जाता था) यूसुफ का पुत्र था, जो एली का पुत्र था, 24वह मत्तात का पुत्र, वह लेवी का पुत्र, वह मलखी का पुत्र, वह यन्नै का पुत्र, वह यूसुफ का पुत्र, 25वह मत्तित्याह का पुत्र, वह आमोस का पुत्र, वह नहूम का पुत्र, वह एस्ली का पुत्र, वह नग्गै का पुत्र, 26वह मात का पुत्र, वह मत्तित्याह का पुत्र, वह शिमी का पुत्र, वह योसेख का पुत्र, वह योदा का पुत्र, 27वह योअन्नान का पुत्र, वह रेसा का पुत्र, वह जरुब्बाबेल का पुत्र, वह शालतीएल का पुत्र, वह नेरी का पुत्र, 28वह मलखी का पुत्र, वह अद्दी का पुत्र, वह कोसाम का पुत्र, वह इल्मोदाम का पुत्र, वह एर का पुत्र, 29वह यहोशू का पुत्र, वह एलीएजेर का पुत्र, वह योरीम का पुत्र, वह मत्तात का पुत्र, वह लेवी का पुत्र, 30वह शिमोन का पुत्र, वह यहूदा का पुत्र, वह यूसुफ का पुत्र, वह योनान का पुत्र, वह एल्याकीम का पुत्र, 31वह मलेआ का पुत्र, वह मिन्ना का पुत्र, वह मत्तता का पुत्र, वह नातान का पुत्र, वह दाऊद का पुत्र, 32वह यिशै का पुत्र, वह ओबेद का पुत्र, वह बोअज़ का पुत्र, वह सलमोन का पुत्र, वह नहशोन का पुत्र, 33वह अम्मीनादाब का पुत्र, वह अदमीन का पुत्र, वह अर्नी का पुत्र, वह हेस्रोन का पुत्र, वह पेरेस का पुत्र, वह यहूदा का पुत्र, 34वह याकूब का पुत्र, वह इसहाक का पुत्र, वह अब्राहम का पुत्र, वह तेरह का पुत्र, वह नाहोर का पुत्र, 35वह सरूग का पुत्र, वह रऊ का पुत्र, वह पेलेग का पुत्र, वह एबेर का पुत्र, वह शेलह का पुत्र, 36वह केनान का पुत्र, वह अरफ़क्षद का पुत्र, वह शेम का पुत्र, वह नूह का पुत्र, वह लेमेक का पुत्र, 37वह मतूशेलह का पुत्र, वह हनोक का पुत्र, वह येरेद का पुत्र, वह महललेल का पुत्र, वह केनान का पुत्र, 38वह एनोश का पुत्र, वह शेत का पुत्र, वह आदम का पुत्र, वह हमारे परमपिता का पुत्र।