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लूका 15 FHB पिता के हृदय की बाइबिल™

पितायीशुआत्मा
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परमपिता एक खोई हुई भेड़ के पीछे जाते हैं

तीन चीज़ें जो हमारे पिता खोते और पाते हैं, और हर एक का अन्त उत्सव में होता है: एक भेड़, एक सिक्का, और एक बेटा जो सब कुछ उड़ा देता है और माफ़ी के शब्द रटता हुआ घर लौटता है, पर उसका पिता दौड़कर उसके पास आता है और उसकी माफ़ी बीच में ही रोक देता है। कहानी यहीं खत्म नहीं होती। बड़ा भाई क्रोधित होकर बाहर ही रहता है।

अध्याय 15।

अब सब चुंगी लेनेवाले और पापी उसकी सुनने के लिए उसके पास आ रहे थे। a a v1 चुंगी लेनेवालों को देशद्रोही समझकर बहुत घृणा की जाती थी — वे यहूदी थे जो रोम के लिए धन इकट्ठा करते थे, अकसर अधिक वसूलते और अंतर की रकम अपनी जेब में रख लेते थे। और फरीसी तथा शास्त्री कुड़कुड़ाकर कहने लगे, “यह मनुष्य तो पापियों का स्वागत करता और उनके साथ भोजन करता है।”

तब उसने उनसे यह दृष्टान्त कहा:

“तुम में से ऐसा कौन है, जिसके पास सौ भेड़ें हों और उनमें से एक खो जाए, तो वह निन्यानबे को खुले मैदान में छोड़कर उस खोई हुई भेड़ को तब तक न ढूँढ़े जब तक वह उसे पा न ले? और जब वह उसे पा लेता है, तो आनन्द के साथ उसे अपने कंधों पर उठा लेता है।” और घर पहुँचकर वह अपने मित्रों और पड़ोसियों को इकट्ठा करके उनसे कहता है, “मेरे साथ आनन्द मनाओ, क्योंकि मैंने अपनी खोई हुई भेड़ पा ली है।” “मैं तुमसे कहता हूँ, इसी प्रकार एक मन फिरानेवाले पापी के कारण स्वर्ग में उन निन्यानबे धर्मियों की अपेक्षा अधिक आनन्द होता है, जिन्हें मन फिराने की आवश्यकता नहीं।”

परमपिता खोए हुए सिक्के को ढूँढ़ते हैं

“अथवा कौन-सी ऐसी स्त्री है, जिसके पास चाँदी के दस सिक्के हों — जिनमें से हर एक दिन भर की मजदूरी के बराबर हो — और उनमें से एक खो जाए, तो वह दीया जलाकर, घर झाड़कर, जब तक उसे पा न ले, तब तक ध्यान से न ढूँढ़े?” और जब वह उसे पा लेती है, तो अपने मित्रों और पड़ोसियों को इकट्ठा करके कहती है, “मेरे साथ आनन्द मनाओ, क्योंकि मैंने अपना खोया हुआ सिक्का पा लिया है।” “इसी प्रकार, मैं तुमसे कहता हूँ, एक मन फिरानेवाले पापी के कारण हमारे परमपिता के स्वर्गदूतों के सामने आनन्द होता है।”

परमपिता अपने पुत्र का घर में स्वागत करने दौड़ पड़ते हैं

फिर उसने कहा, “किसी मनुष्य के दो पुत्र थे।”

उनमें से छोटे पुत्र ने अपने पिता से कहा, “हे पिता, सम्पत्ति में से मेरा भाग मुझे दे दीजिए।” तब उसने अपनी सम्पत्ति उन दोनों में बाँट दी। थोड़े ही दिनों के बाद छोटा पुत्र सब कुछ इकट्ठा करके दूर देश को चला गया, और वहाँ कुकर्म में अपनी सारी सम्पत्ति उड़ा दी। जब वह सब कुछ खर्च कर चुका, तो उस देश में भारी अकाल पड़ा, और वह कंगाल होने लगा। तब वह जाकर उस देश के किसी निवासी के यहाँ नौकर हो गया, और उसने उसे अपने खेतों में सूअर चराने के लिए भेज दिया। और वह चाहता था कि उन फलियों से जिन्हें सूअर खाते थे, अपना पेट भर ले, पर कोई उसे कुछ नहीं देता था।

तब अपने होश में आकर उसने कहा, “मेरे पिता के कितने ही मजदूरों को भरपूर रोटी मिलती है, और मैं यहाँ भूखा मर रहा हूँ! मैं उठकर अपने पिता के पास जाऊँगा और उससे कहूँगा, ‘हे पिता, मैंने स्वर्ग के विरुद्ध और तेरे सामने पाप किया है। अब मैं इस योग्य नहीं रहा कि तेरा पुत्र कहलाऊँ; मुझे अपने किसी मजदूर के समान रख ले।’”

“तब वह उठकर अपने पिता के पास चला। वह अभी दूर ही था कि उसके पिता ने उसे देख लिया, और उसका हृदय दया से भर आया — वह दौड़ा, उसे गले लगा लिया और उसे चूमा। b b v20 यीशु के समय की संस्कृति में प्रतिष्ठित पुरुष सार्वजनिक रूप से कभी नहीं दौड़ता था — पिता का दौड़कर जाना प्रेम और स्वयं को दीन करने का एक चौंका देनेवाला, जान-बूझकर किया गया कार्य था।

पुत्र ने उससे कहा, ‘हे पिता, मैंने स्वर्ग के विरुद्ध और तेरे सामने पाप किया है। अब मैं इस योग्य नहीं रहा कि तेरा पुत्र कहलाऊँ।’

परन्तु पिता ने अपने दासों से कहा, ‘झटपट सबसे अच्छा वस्त्र निकालकर उसे पहनाओ, और उसके हाथ में अँगूठी और पाँवों में जूतियाँ पहनाओ।

और उस पले हुए बछड़े को लाकर काटो, कि हम खाकर आनन्द मनाएँ। क्योंकि मेरा यह पुत्र मर गया था, फिर जी गया है; खो गया था, फिर मिल गया है।’ और वे आनन्द मनाने लगे।”

“उसका बड़ा पुत्र खेत में था; और जब वह लौटते हुए घर के निकट पहुँचा, तो उसने गाने-बजाने और नाचने का शब्द सुना। और उसने एक दास को बुलाकर पूछा, ‘यह क्या हो रहा है?’ उसने उससे कहा, ‘तेरा भाई आया है, और तेरे पिता ने वह पला हुआ बछड़ा कटवाया है, क्योंकि उसने उसे भला-चंगा वापस पाया है।’ इस पर वह क्रोधित हुआ और भीतर जाना न चाहा। तब उसका पिता बाहर आकर उसे मनाने लगा, परन्तु उसने अपने पिता को उत्तर दिया, ‘देख, इतने वर्षों से मैं तेरी सेवा करता आ रहा हूँ, और कभी तेरी आज्ञा नहीं टाली, फिर भी तूने मुझे कभी एक बकरी का बच्चा तक न दिया कि मैं अपने मित्रों के साथ आनन्द मनाता। परन्तु जब तेरा यह पुत्र, जिसने वेश्याओं के साथ तेरी सम्पत्ति उड़ा दी, आया, तो तूने उसके लिए वह पला हुआ बछड़ा कटवा दिया!’

उसने उससे कहा, ‘हे पुत्र, तू तो सदा मेरे साथ है, और जो कुछ मेरा है वह सब तेरा ही है।

पर आनन्द मनाना और खुशियाँ करना उचित ही था, क्योंकि तेरा यह भाई मर गया था, फिर जी गया है; खो गया था, फिर मिल गया है।’”