हमारे परमपिता मूसा और हारून से बात करते हैं
15 1हमारे परमपिता ने मूसा और हारून से कहा:
2“इस्राएल के लोगों से कहो: जब किसी पुरुष के शरीर से स्राव बहता हो, तो उसका स्राव अशुद्ध है। 3स्राव से उसकी अशुद्धता इस प्रकार है: चाहे उसका शरीर स्राव बहाता रहे, या स्राव रुक जाए, दोनों दशा में वह उसकी अशुद्धता है।
4“जिस बिछौने पर स्राव वाला पुरुष लेटे, वह अशुद्ध है; और जिस-जिस वस्तु पर वह बैठे, वह भी अशुद्ध है। 5जो कोई उसके बिछौने को छुए, वह अपने वस्त्र धोए, जल से स्नान करे, और सांझ तक अशुद्ध रहे। 6जिस वस्तु पर स्राव वाला पुरुष बैठा हो, उस पर जो कोई बैठे, वह अपने वस्त्र धोए, जल से स्नान करे, और सांझ तक अशुद्ध रहे।
7“जो कोई स्राव वाले पुरुष के शरीर को छुए, वह अपने वस्त्र धोए, जल से स्नान करे, और सांझ तक अशुद्ध रहे। 8यदि स्राव वाला पुरुष किसी शुद्ध मनुष्य पर थूक दे, तो वह मनुष्य अपने वस्त्र धोए, जल से स्नान करे, और सांझ तक अशुद्ध रहे।
9“जिस काठी पर स्राव वाला पुरुष सवार हो, वह अशुद्ध है। 10जो कोई उस वस्तु को छुए जो उसके नीचे थी, वह सांझ तक अशुद्ध रहे; और जो कोई उन वस्तुओं को उठाए, वह अपने वस्त्र धोए, जल से स्नान करे, और सांझ तक अशुद्ध रहे।
11“जिस किसी को स्राव वाला पुरुष बिना हाथ जल से धोए छू ले, वह अपने वस्त्र धोए, जल से स्नान करे, और सांझ तक अशुद्ध रहे। 12जिस मिट्टी के बर्तन को स्राव वाला पुरुष छुए, वह तोड़ डाला जाए; और हर काठ का पात्र जल से धोया जाए।
13“जब स्राव वाला पुरुष अपने स्राव से शुद्ध हो जाए, तब वह अपने शुद्ध होने के लिए सात दिन गिने, अपने वस्त्र धोए, अपने शरीर को ताज़े बहते जल से स्नान कराए, और शुद्ध ठहरे। 14आठवें दिन वह दो पंडुक या कबूतर के दो बच्चे ले, और मिलापवाले तम्बू के द्वार पर हमारे परमपिता के सम्मुख आकर उन्हें याजक को दे। 15याजक एक को पापबलि और दूसरे को होमबलि करके चढ़ाए, और इस प्रकार याजक उसके स्राव के कारण हमारे परमपिता के सम्मुख उसके लिए प्रायश्चित करे।
16“यदि किसी पुरुष का वीर्य स्खलित हो जाए, तो वह अपने सारे शरीर को जल से स्नान कराए, और सांझ तक अशुद्ध रहे। 17जिस वस्त्र या चमड़े पर वीर्य लगा हो, वह जल से धोया जाए, और सांझ तक अशुद्ध रहे। 18यदि कोई पुरुष किसी स्त्री के संग सोए और वीर्य स्खलित हो, तो वे दोनों जल से स्नान करें, और सांझ तक अशुद्ध रहें।
19“जब किसी स्त्री के शरीर से रक्त का स्राव हो, तो वह सात दिन तक अपने मासिक धर्म की अशुद्धता में रहे; और जो कोई उसे छुए, वह सांझ तक अशुद्ध रहे। 20उसकी अशुद्धता के समय जिस वस्तु पर वह लेटे, वह अशुद्ध है, और जिस वस्तु पर वह बैठे, वह भी अशुद्ध है। 21जो कोई उसके बिछौने को छुए, वह अपने वस्त्र धोए, जल से स्नान करे, और सांझ तक अशुद्ध रहे। 22जिस वस्तु पर वह बैठे, उसे जो कोई छुए, वह अपने वस्त्र धोए, जल से स्नान करे, और सांझ तक अशुद्ध रहे। 23चाहे बिछौना हो या वह वस्तु जिस पर वह बैठे, उसे छूने से मनुष्य सांझ तक अशुद्ध हो जाता है।
24“यदि कोई पुरुष उसके संग सोए और उसके मासिक धर्म की अशुद्धता उसे लग जाए, तो वह सात दिन तक अशुद्ध रहे; और जिस बिछौने पर वह लेटे, वह भी अशुद्ध है।
25“यदि किसी स्त्री का रक्त उसके मासिक धर्म के समय से बाहर बहुत दिनों तक बहता रहे, अथवा उस समय से अधिक, तो वह अपने स्राव के सारे समय में अपने मासिक धर्म के दिनों के समान अशुद्ध रहे। 26उसके स्राव के समय जिस बिछौने पर वह लेटे, वह उसके मासिक धर्म के बिछौने के समान है; और जिस वस्तु पर वह बैठे, वह उसके मासिक धर्म की अशुद्धता के समान अशुद्ध है। 27जो कोई उन्हें छुए, वह अशुद्ध हो जाए; वह अपने वस्त्र धोए, जल से स्नान करे, और सांझ तक अशुद्ध रहे।
28“जब वह अपने स्राव से शुद्ध हो जाए, तब वह सात दिन गिने, और उसके बाद वह शुद्ध ठहरे। 29आठवें दिन वह दो पंडुक या कबूतर के दो बच्चे ले, और उन्हें मिलापवाले तम्बू के द्वार पर याजक के पास ले आए। 30याजक एक को पापबलि और दूसरे को होमबलि करके चढ़ाए, और उसके अशुद्ध स्राव के कारण हमारे परमपिता के सम्मुख उसके लिए प्रायश्चित करे।
31“इस्राएलियों को उनकी अशुद्धता से अलग रखना, ऐसा न हो कि वे अपने बीच मेरे निवासस्थान को अशुद्ध करके अपनी अशुद्धता में मर जाएँ।
32“जिस पुरुष को स्राव हो, और जिसके वीर्य स्खलित होने से वह अशुद्ध हो जाए, उसके लिये यही व्यवस्था है, 33और जो स्त्री अपने मासिक धर्म की अशुद्धता में हो, और जिस किसी पुरुष या स्त्री को स्राव हो, और जो पुरुष किसी अशुद्ध स्त्री के संग सोए, उन सभों के लिये यही व्यवस्था है।”