पढ़ें। ग्रहण करें। सुझाव दें।

♥ समीक्षाएँ

न्यायियों 11

पुस्तक

परमपिता एक तिरस्कृत पुत्र को ऊँचा उठाते हैं

अध्याय 11।

यिप्तह गिलादी एक पराक्रमी योद्धा था, परन्तु एक वेश्या का पुत्र था। गिलाद उसका पिता था। गिलाद की पत्नी ने भी उसके लिये पुत्र जने। जब वे बड़े हुए, तब उन्होंने यिप्तह को यह कहकर निकाल दिया, “तू हमारे पिता के घराने में कोई भाग न पाएगा—तू तो पराई स्त्री का पुत्र है।” यिप्तह अपने भाइयों के पास से भागकर तोब देश में जा बसा, जहाँ लुच्चे लोग उसके पास इकट्ठे होकर उसके साथ निकलने लगे।

कुछ समय के बाद अम्मोनियों ने इस्राएल से युद्ध किया। जब अम्मोन इस्राएल से लड़ रहा था, तब गिलाद के पुरनिये यिप्तह को तोब देश से लिवा लाने गए। उन्होंने यिप्तह से कहा, “आ, हमारा प्रधान हो जा, कि हम अम्मोनियों से लड़ सकें।”

यिप्तह ने गिलाद के पुरनियों से कहा, “क्या तुम ने मुझ से बैर करके मुझे मेरे पिता के घर से निकाल न दिया था? अब संकट के समय मेरे पास क्यों आए हो?”

गिलाद के पुरनियों ने यिप्तह को उत्तर दिया, “इसी कारण तो हम अब तेरे पास लौट आए हैं: हमारे संग चलकर अम्मोनियों से लड़, और तू गिलाद के सब निवासियों पर हमारा मुखिया ठहरेगा।”

यिप्तह ने गिलाद के पुरनियों से कहा, “यदि तुम मुझे अम्मोनियों से लड़ने के लिये लौटा ले चलो, और हमारे परमपिता उन्हें मेरे हाथ कर दें, तो मैं तुम्हारा मुखिया बनूँगा।”

गिलाद के पुरनियों ने यिप्तह से कहा, “हमारे परमपिता हमारे बीच साक्षी हैं, यदि हम ठीक तेरे कहे अनुसार न करें।”

तब यिप्तह गिलाद के पुरनियों के संग गया, और लोगों ने उसे अपना मुखिया और प्रधान बना लिया। और उसने अपनी सब बातें मिस्पा में हमारे परमपिता के सामने कहीं।

फिर यिप्तह ने अम्मोनियों के राजा के पास दूत भेजकर कहा, “हमारे और तेरे बीच क्या है, कि तू मेरे देश से लड़ने को आया है?”

अम्मोनियों के राजा ने यिप्तह के दूतों से कहा, “इस्राएल ने मिस्र से आते समय अर्नोन से लेकर यब्बोक और यरदन तक मेरा देश छीन लिया था; अब उसे शान्ति से लौटा दे।”

यिप्तह ने फिर अम्मोनियों के राजा के पास दूत भेजकर उससे कहा, “यिप्तह यों कहता है: इस्राएल ने न तो मोआब का देश लिया, और न अम्मोनियों का। जब इस्राएल मिस्र से निकल आया, तब वह जंगल में होकर लाल समुद्र तक गया और कादेश को पहुँचा। तब इस्राएल ने एदोम के राजा के पास दूत भेजकर कहा, ‘मुझे अपने देश में से होकर जाने दे,’ परन्तु उसने न सुना। और उन्होंने मोआब के राजा के पास भी दूत भेजे, परन्तु उसने भी न माना। इसलिये इस्राएल कादेश में ही रह गया। फिर वे जंगल में होकर एदोम और मोआब देश के बाहर बाहर घूमकर मोआब देश के पूर्व की ओर पहुँचे, और अर्नोन के पार डेरे डाले; परन्तु मोआब के सिवाने के भीतर न गए, क्योंकि अर्नोन ही मोआब का सिवाना था। तब इस्राएल ने एमोरियों के राजा सीहोन के पास, जो हेशबोन का राजा था, दूत भेजकर कहा, ‘हमें अपने देश में से होकर हमारे स्थान तक जाने दे।’ परन्तु सीहोन ने इस्राएल पर इतना भरोसा न किया कि उसे अपने सिवाने में से होकर जाने दे; वरन उसने अपनी सारी प्रजा इकट्ठी कर के यहस में डेरे डाले, और इस्राएल से युद्ध किया। तब हमारे परमपिता, इस्राएल के परमेश्वर, ने सीहोन को उसकी सारी प्रजा समेत इस्राएल के हाथ में कर दिया, और उन्होंने उन्हें मार लिया; और इस्राएल ने एमोरियों का सारा देश जो उस देश में रहते थे अपने वश में कर लिया। उन्होंने अर्नोन से लेकर यब्बोक तक, और जंगल से लेकर यरदन तक, एमोरियों का सारा देश अपने वश में कर लिया। अब जब कि हमारे परमपिता, इस्राएल के परमेश्वर, ने एमोरियों को अपनी प्रजा इस्राएल के सामने से निकाल दिया है—तो क्या तू उसका अधिकारी होगा? जो कुछ तेरा देवता कमोश तुझे अधिकार में दे दे, क्या तू उसका अधिकारी न होगा? वैसे ही जिस जिस को हमारे परमपिता ने हमारे सामने से निकाल दिया है, उन सभों के हम अधिकारी होंगे। फिर क्या तू सिप्पोर के पुत्र मोआब के राजा बालाक से कुछ अच्छा है? क्या उसने कभी इस्राएल से झगड़ा किया, या उनसे युद्ध किया? जब इस्राएल तीन सौ वर्ष तक हेशबोन और उसके गाँवों में, और अरोएर और उसके गाँवों में, और अर्नोन के किनारे के सब नगरों में बसा रहा, तब तू ने उन्हें उस समय क्यों न छुड़ा लिया? मैंने तेरा कुछ अपराध नहीं किया, परन्तु तू मुझ से युद्ध करके मुझ से बुरा बर्ताव करता है। हमारे परमपिता जो न्यायी हैं, वे ही आज इस्राएलियों और अम्मोनियों के बीच न्याय करें।”

परन्तु अम्मोनियों के राजा ने यिप्तह के इस संदेश पर, जो उसने भेजा था, कुछ ध्यान न दिया।

परमपिता का आत्मा और एक दुखद मन्नत

तब हमारे पिता का आत्मा यिप्तह पर उतरा, और वह गिलाद और मनश्शे में से होकर गिलाद के मिस्पा में होकर गया, और गिलाद के मिस्पा से आगे बढ़कर अम्मोनियों की ओर चला।

और यिप्तह ने हमारे परमपिता के लिये यह मन्नत मानी, “यदि तू अम्मोनियों को सचमुच मेरे हाथ में कर दे, तो जब मैं कुशल से अम्मोनियों के पास से लौट आऊँ, तब जो कोई मेरे भेंट के लिये मेरे घर के द्वार से निकले, वह हमारे परमपिता का हो जाएगा, और मैं उसे होमबलि करके चढ़ाऊँगा।”

तब यिप्तह अम्मोनियों से युद्ध करने को उनके पास पार गया, और हमारे परमपिता ने उन्हें उसके हाथ में कर दिया। और उसने अरोएर से लेकर मिन्नीत के निकट तक—बीस नगर—और आबेल्करामीम तक बड़ी मार के साथ उन्हें मारा। इस प्रकार अम्मोनी इस्राएलियों के सामने दब गए।

जब यिप्तह मिस्पा को अपने घर आया, तब उसकी बेटी डफ बजाती और नाचती हुई उससे भेंट करने को निकल आई; वह उसकी अकेली सन्तान थी, उसके सिवाय उसके न कोई बेटा था और न बेटी। उसको देखते ही उसने अपने वस्त्र फाड़कर कहा, “हाय, मेरी बेटी! तू ने मुझे बहुत ही दुखी कर दिया—तू ही मेरे कष्ट का कारण हो गई है। क्योंकि मैंने हमारे परमपिता को वचन दिया है, और उसे टाल नहीं सकता।”

उसने उससे कहा, “हे मेरे पिता, तू ने हमारे परमपिता को वचन दिया है, तो जो बात तेरे मुँह से निकली है उसी के अनुसार मेरे साथ कर, क्योंकि हमारे परमपिता ने तेरे शत्रु अम्मोनियों से तेरा पलटा ले लिया है।” फिर उसने अपने पिता से कहा, “मेरे लिये केवल इतना किया जाए: मुझे दो महीने का अवकाश दे कि मैं अपनी सहेलियों समेत पहाड़ों पर जाकर अपने कुँवारेपन के कारण विलाप करूँ।”

उसने कहा, “जा,” और उसे दो महीने के लिये विदा किया। तब वह अपनी सहेलियों समेत गई, और पहाड़ों पर अपने कुँवारेपन के कारण रोती रही। दो महीने के बाद वह अपने पिता के पास लौट आई, और उसने अपनी मानी हुई मन्नत उस पर पूरी की। उसने कभी किसी पुरुष का मुँह न देखा था; और इस्राएल में यह रीति चल पड़ी, कि इस्राएल की बेटियाँ प्रति वर्ष चार दिन तक यिप्तह गिलादी की बेटी की स्मृति में विलाप करने को जाया करती थीं।

A young man reading the Father's Heart Bible print edition in a coffee shop अब छपाई में

टिप्पणियाँ

इस अध्याय ने आपके मन में जो विचार, प्रश्न या शब्द जगाया — उसे यहाँ साझा करें। हर टिप्पणी आपका नाम योगदानकर्ताओं की दीवार पर जोड़ती है।

पढ़ना, सुनना, कॉपी करना और साझा करना सबके लिए खुला है — खाते की ज़रूरत नहीं। टिप्पणी करना, हाइलाइट करना और अपनी जगह याद रखना मुफ़्त खाते के साथ आते हैं, और हर टिप्पणी आपका नाम योगदानकर्ताओं की दीवार पर जोड़ती है।

परिवार में शामिल हों — यह मुफ़्त है →
  • अभी कोई टिप्पणी नहीं। अपनी आवाज़ जोड़ने वाले पहले बनें।