Read. Receive. Recommend.

♥ Reviews

यूहन्ना 12

Book

मरियम का अत्यधिक प्रेम

Chapter 12.

फसह के पर्व से छ: दिन पहले, यीशु बैतनिय्याह आए, जहाँ लाजर था, वही जिसे यीशु ने मरे हुओं में से जिलाया था। वहाँ उन्होंने उसके लिये भोज दिया। मारथा सेवा टहल कर रही थी, और लाजर उन में से एक था जो उसके साथ भोजन पर बैठे थे। तब मरियम ने शुद्ध जटामांसी का लगभग आधा सेर बहुमूल्य इत्र लिया, और यीशु के पाँवों पर मला और अपने बालों से उसके पाँव पोंछे। और घर इत्र की सुगन्ध से भर गया।

परन्तु यहूदा इस्करियोती ने, जो उसके चेलों में से एक था, और जो उसे पकड़वाने पर था, कहा, “यह इत्र लगभग एक वर्ष की मजदूरी में क्यों न बेचा गया और कंगालों को क्यों न दिया गया?” उसने यह इसलिये न कहा कि उसे कंगालों की चिन्ता थी, परन्तु इसलिये कि वह चोर था; और उसके पास थैली रहती थी और उस में जो कुछ डाला जाता था, उस में से निकाल लिया करता था।

यीशु ने कहा, “उसे रहने दो। उसने यह मेरे गाड़े जाने के दिन के लिये रखा है।” “कंगाल तो सदा तुम्हारे साथ रहते हैं, परन्तु मैं सदा तुम्हारे साथ न रहूँगा।”

इसी बीच यहूदियों की एक बड़ी भीड़ ने जाना कि वह वहाँ है, तो वे न केवल यीशु के कारण आए, परन्तु इसलिये भी कि लाजर को देखें, जिसे उसने मरे हुओं में से जिलाया था। इसलिये प्रधान याजकों ने लाजर को भी मार डालने की सोची, क्योंकि उसके कारण बहुत से यहूदी चले जाते और यीशु पर विश्वास करते थे।

राजा सवार होकर आता है

दूसरे दिन उस बड़ी भीड़ ने जो पर्व में आई थी, यह सुना कि यीशु यरूशलेम आ रहा है। तब उन्होंने खजूर की डालियाँ लीं और उससे भेंट करने को निकले, और यह पुकारते रहे, “होशाना! धन्य है वह जो प्रभु परमपिता के नाम से आता है — इस्राएल का राजा!” a a v13 होशाना का अर्थ है “अब बचा ले!” — यह भजन 118 से भीड़ की पुकार है, जब वे यीशु का बहुप्रतीक्षित राजा के रूप में स्वागत करते हैं।

यीशु को एक गदही का बच्चा मिला और वह उस पर सवार हुआ, जैसा लिखा है: “हे सिय्योन की बेटी, मत डर; देख, तेरा राजा गदहे के बच्चे पर सवार होकर आ रहा है।” उसके चेले ये बातें पहले न समझे, परन्तु जब यीशु की महिमा हुई, तब उन्हें स्मरण आया कि ये बातें उसके विषय में लिखी हुई थीं, और लोगों ने उसके साथ यही किया था। तब जो भीड़ उसके साथ थी जब उसने लाजर को कब्र में से बुलाया और मरे हुओं में से जिलाया, वह गवाही देती रही। इसी कारण भीड़ उससे भेंट करने को गई, क्योंकि उन्होंने सुना था कि उसने यह चिन्ह दिखाया है। इस पर फरीसियों ने आपस में कहा, “तुम देखते हो कि तुम्हारा कुछ नहीं बन पड़ता; देखो, सारा जगत उसके पीछे हो लिया है!”

यूनानी यीशु को ढूँढ़ते हैं

जो लोग पर्व में आराधना करने आए थे, उन में कुछ यूनानी थे। उन्होंने फिलिप्पुस के पास आकर, जो गलील के बैतसैदा का था, उससे विनती की, “श्रीमान, हम यीशु को देखना चाहते हैं।” फिलिप्पुस ने जाकर अन्द्रियास से कहा; तब अन्द्रियास और फिलिप्पुस ने जाकर यीशु से कहा।

यीशु ने उन्हें उत्तर दिया, “वह घड़ी आ पहुँची है कि मनुष्य का पुत्र महिमा पाए।” “मैं तुम से सच सच कहता हूँ, जब तक गेहूँ का दाना भूमि में पड़कर मर नहीं जाता, वह अकेला रहता है; परन्तु जब मर जाता है, तो बहुत फल लाता है।” “जो अपने प्राण को प्रिय जानता है, वह उसे खो देता है; और जो इस जगत में अपने प्राण से बैर रखता है, वह उसे अनन्त जीवन के लिये बचा रखेगा।” “यदि कोई मेरी सेवा करे, तो मेरे पीछे हो ले; और जहाँ मैं हूँ, वहाँ मेरा सेवक भी होगा। यदि कोई मेरी सेवा करे, तो मेरा परमपिता उसका आदर करेगा।”

“अब मेरा जी व्याकुल है। और मैं क्या कहूँ? ‘हे परमपिता, मुझे इस घड़ी से बचा’? परन्तु मैं इसी कारण तो इस घड़ी को पहुँचा हूँ। हे परमपिता, अपने नाम की महिमा कर।”

तब आकाश से यह शब्द आया: “मैंने उसकी महिमा की है, और फिर भी करूँगा।”

जो भीड़ वहाँ खड़ी सुन रही थी, उसने कहा कि बादल गरजा; औरों ने कहा, “कोई स्वर्गदूत उससे बोला।”

यीशु ने उत्तर दिया, “यह शब्द मेरे लिये नहीं, परन्तु तुम्हारे लिये आया है।” “अब इस जगत का न्याय होता है, अब इस जगत का सरदार निकाल दिया जाएगा।” “और मैं यदि पृथ्वी पर से ऊँचे पर चढ़ाया जाऊँगा, तो सब को अपने पास खींचूँगा।” यह कहकर उसने संकेत किया कि वह कैसी मृत्यु से मरेगा।

इस पर भीड़ ने उसे उत्तर दिया, “हम ने व्यवस्था से सुना है कि मसीह सर्वदा रहेगा; फिर तू क्यों कहता है कि ‘मनुष्य के पुत्र को ऊँचे पर चढ़ाया जाना अवश्य है’? यह मनुष्य का पुत्र कौन है?”

यीशु ने उन से कहा, “ज्योति अब थोड़ी देर और तुम्हारे बीच है। जब तक ज्योति तुम्हारे साथ है, तब तक चलते रहो, कहीं ऐसा न हो कि अन्धकार तुम्हें आ घेरे। जो अन्धकार में चलता है, वह नहीं जानता कि किधर जाता है।” “जब तक ज्योति तुम्हारे साथ है, ज्योति पर विश्वास करो, ताकि तुम ज्योति की सन्तान बनो।” ये बातें कहकर यीशु चला गया और उन से छिप गया।

जब तक ज्योति है तब तक चलते रहो

यद्यपि उसने उनके सामने इतने चिन्ह दिखाए थे, तौभी उन्होंने उस पर विश्वास न किया, ताकि यशायाह भविष्यद्वक्ता का वह वचन पूरा हो जो उसने कहा था: “हे प्रभु परमपिता, हमारे समाचार पर किस ने विश्वास किया? और हमारे परमपिता की भुजा किस पर प्रगट हुई?”

इस कारण वे विश्वास न कर सके, क्योंकि यशायाह ने फिर कहा: “उसने उनकी आँखें अन्धी कर दीं, और उनका मन कठोर कर दिया, कहीं ऐसा न हो कि वे आँखों से देखें, और मन से समझें, और फिर जाएँ — और मैं उन्हें चंगा करूँ।”

यशायाह ने ये बातें इसलिये कहीं क्योंकि उसने यीशु की महिमा देखी और उसी के विषय में कहा। b b v41 यूहन्ना हमें स्पष्ट बताता है: जब यशायाह ने मन्दिर में सिंहासन देखा और साराप ने पुकारा “पवित्र, पवित्र, पवित्र,” तब वह यीशु की ही महिमा देख रहा था। तौभी सरदारों में से भी बहुतों ने उस पर विश्वास किया; परन्तु फरीसियों के कारण वे प्रगट में नहीं मानते थे, ऐसा न हो कि वे आराधनालय में से निकाले जाएँ; क्योंकि वे हमारे परमपिता की ओर से मिलनेवाली महिमा से बढ़कर मनुष्यों की ओर से मिलनेवाली महिमा से प्रेम रखते थे।

तब यीशु ने पुकारकर कहा, “जो मुझ पर विश्वास करता है, वह मुझ पर नहीं, परन्तु मेरे भेजनेवाले पर विश्वास करता है।” “और जो मुझे देखता है, वह मेरे भेजनेवाले को देखता है।” “मैं जगत में ज्योति होकर आया हूँ, ताकि जो कोई मुझ पर विश्वास करे, वह अन्धकार में न रहे।” “यदि कोई मेरी बातें सुनकर उन्हें न माने, तो मैं उसे दोषी नहीं ठहराता; क्योंकि मैं जगत को दोषी ठहराने नहीं, परन्तु जगत का उद्धार करने आया हूँ।” “जो मुझे तुच्छ जानता है और मेरी बातें ग्रहण नहीं करता, उसका एक न्यायी है: जो वचन मैंने कहा है, वही अन्तिम दिन में उसका न्याय करेगा।” “क्योंकि मैंने अपनी ओर से नहीं कहा; परन्तु परमपिता ने, जिसने मुझे भेजा, उसी ने मुझे आज्ञा दी कि क्या कहूँ और कैसे कहूँ।” “और मैं जानता हूँ कि उसकी आज्ञा अनन्त जीवन है। इसलिये मैं जो कुछ कहता हूँ, वह जैसा परमपिता ने मुझ से कहा है, वैसा ही कहता हूँ।”

A young man reading the Father's Heart Bible print edition in a coffee shop Now in Print

Comments

Thoughts, questions, or a word this chapter stirred in you — share it here. Every comment puts your name on the Wall of Contributors.

Reading, listening, copying and sharing are open to everyone — no account needed. Commenting, highlighting, and bookmarking your place come with a free account, and every comment puts your name on the Wall of Contributors.

Join the Family — it's free →
  • No comments yet. Be the first to add your voice.