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अय्यूब 21 FHB पिता के हृदय की बाइबिल™

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अय्यूब का उत्तर: दुष्ट लोग क्यों फलते-फूलते हैं?

अय्यूब उस प्रमाण से उत्तर देता है जिसे उसके मित्र अनदेखा करते हैं: दुष्ट सचमुच बूढ़े और शक्तिशाली होते हैं, उनके बच्चे नाचते हैं, और वे परमेश्वर से यह कहकर कि हमें छोड़ दे, शान्ति से मरते हैं। तृप्त और कड़वाहट से भरा, दोनों धूल में लेट जाते हैं। वह कहता है, तुम्हारी सांत्वना झूठ है।

अध्याय 21।

तब अय्यूब ने उत्तर दिया: “मेरी बातों को ध्यान से सुनो, और यही वह सान्त्वना हो जो तुम मुझे देते हो। जब मैं बोलूँ तब मुझे सह लो, और जब मैं बोल चुकूँ, तब तुम ठट्ठा करते रहना। जहाँ तक मेरा प्रश्न है, क्या मेरी शिकायत किसी मनुष्य के विरुद्ध है? फिर मैं अधीर क्यों न हो जाऊँ? मेरी ओर देखो और चकित रह जाओ, और अपना हाथ अपने मुँह पर रख लो। जब मैं इसे स्मरण करता हूँ, तब भयभीत हो जाता हूँ, और मेरी देह काँप उठती है। दुष्ट लोग क्यों जीवित रहते हैं, वृद्ध होते और सामर्थ्य में बढ़ते जाते हैं? उनके बच्चे उनके संग उनकी आँखों के सामने स्थिर और सुरक्षित रहते हैं, और उनकी सन्तान उनकी दृष्टि के सामने बसी रहती है। उनके घर भय से मुक्त और सुरक्षित रहते हैं, और परमेश्वर का दण्ड उन पर नहीं पड़ता। उनका साँड़ बिना चूके गाभिन करता है; उनकी गाय बछड़ा जनती है और उसका गर्भ नहीं गिरता। वे अपने नन्हे बालकों को झुण्ड के समान स्वतन्त्र छोड़ देते हैं, और उनके बच्चे उछलते-कूदते हैं। वे डफ और वीणा के संग गाते हैं, और बाँसुरी की ध्वनि पर आनन्द मनाते हैं। वे अपने दिन समृद्धि में बिताते हैं, और शान्ति से कब्र में उतर जाते हैं। फिर भी वे परमेश्वर से कहते हैं, ‘हमसे दूर रह! तेरे मार्गों को जानने की हमें कोई इच्छा नहीं। सर्वशक्तिमान क्या है, कि हम उसकी सेवा करें? और उससे प्रार्थना करने में हमें क्या लाभ होगा?’ परन्तु उनकी समृद्धि उनके अपने हाथ में नहीं है; दुष्टों की युक्ति से मेरा कोई सरोकार नहीं। कितनी बार दुष्टों का दीपक बुझाया जाता है? कितनी बार उन पर विपत्ति आ पड़ती है? कितनी बार परमेश्वर अपने क्रोध में उन्हें पीड़ाएँ बाँटता है? कितनी बार वे वायु के सामने भूसे के समान होते हैं, उस भूसी के समान जिसे आँधी उड़ा ले जाती है? तुम कहते हो, ‘परमेश्वर मनुष्य का दण्ड उसके बच्चों के लिए संचित कर रखता है।’ वह मनुष्य को स्वयं बदला दे, कि वह उसे भोग ले। उसकी अपनी आँखें उसका विनाश देखें, और वह सर्वशक्तिमान के प्रकोप को पीए। क्योंकि जब उसके महीने घटा दिए जाते हैं, तब उसे अपने पीछे रहनेवाले घराने की क्या चिन्ता? क्या कोई परमेश्वर को ज्ञान सिखा सकता है, जबकि वही ऊँचे पदवालों का न्याय करता है? एक जन पूरी शक्ति में मरता है, पूर्णतः सुखी और सुरक्षित रहते हुए, उसकी देह भली-भाँति पुष्ट रहती है और उसकी हड्डियों का गूदा अब भी तर रहता है। दूसरा कड़वे प्राण के साथ मरता है, कभी कोई सुख न चखते हुए। वे दोनों एक साथ मिट्टी में लेट जाते हैं, और कीड़े उन दोनों को ढाँप लेते हैं। देखो, मैं तुम्हारे विचार जानता हूँ, और वे युक्तियाँ जिनसे तुम मेरे साथ अन्याय करना चाहते हो। क्योंकि तुम कहते हो, ‘अब कहाँ है उस कुलीन का घर? कहाँ है वह तम्बू जिसमें दुष्ट रहते थे?’ क्या तुमने कभी उन यात्रियों से नहीं पूछा जो मार्गों पर चलते हैं? क्या तुम वह प्रमाण स्वीकार न करोगे जो वे देते हैं, कि विपत्ति के दिन दुष्ट जन बचा रहता है, कि प्रकोप के दिन वह छुड़ा लिया जाता है? कौन उसके आचरण के लिए उसके मुँह पर उसका सामना करता है, और कौन उसके किए का बदला उसे देता है? वह कब्र तक पहुँचाया जाता है, और उसकी समाधि पर पहरा रखा जाता है। घाटी की मिट्टी उसे मीठी लगती है; हर कोई उसके पीछे चलता है, और उससे पहले चले हुए अनगिनत हैं। फिर तुम खोखली बातों से मुझे कैसे सान्त्वना दे सकते हो? तुम्हारे उत्तर तो झूठ के सिवा कुछ नहीं।”