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उत्पत्ति 1 FHB पिता के हृदय की बाइबिल™

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पुस्तक

हमारे परमपिता सृष्टि को अपने वचन से रचते हैं

आरंभ की पुस्तक: सृष्टि और पतन, जलप्रलय और वाचा, और अब्राहम के परिवार का बुलाया जाना, जिसके द्वारा सारा संसार आशीषित होता। पवित्रशास्त्र वहीं से खुलता है जहाँ से सुसमाचार खुलता है—हमारे पिता के साथ, जो अपने लिए एक संसार और एक परिवार बना रहे हैं।

अध्याय 1।

आदि में हमारे स्वर्गीय पिता ने आकाश और पृथ्वी की सृष्टि की। a a v1 जो वाणी सृष्टि को अस्तित्व में बुलाती है, वह परमपिता की है। परमपिता परमेश्वर, त्रिएकता के पहले व्यक्ति, पुत्र के द्वारा सृष्टि करते हैं — जो उनका अनन्त वचन है (यूहन्ना 1:3; कुलुस्सियों 1:16) — जबकि परमेश्वर का आत्मा जल के ऊपर मंडराता रहा (उत्पत्ति 1:2)। बाइबल किसी दूर के देवता से नहीं, वरन् एक ऐसे पिता से आरम्भ होती है जो निकट आते हैं। पृथ्वी बेडौल और सुनसान थी; गहरे जल के ऊपर अंधकार छाया हुआ था, और हमारे पिता का आत्मा जल के ऊपर मंडरा रहा था।

तब हमारे परमपिता ने कहा, “उजियाला हो,” और उजियाला हो गया।

उन्होंने देखा कि उजियाला अच्छा है, और उन्होंने उजियाले को अंधकार से अलग किया। उन्होंने उजियाले को “दिन” और अंधकार को “रात” कहा। सांझ हुई और भोर हुआ—पहला दिन।

और हमारे परमपिता ने कहा, “जल के बीच एक अन्तर हो, जो जल को जल से अलग करे।”

उन्होंने वह अन्तर बनाया और उसके नीचे के जल को उसके ऊपर के जल से अलग किया। और ऐसा ही हो गया। उन्होंने उस अन्तर को “आकाश” कहा। इस प्रकार सांझ हुई और भोर हुआ—दूसरा दिन।

तब हमारे परमपिता ने कहा, “आकाश के नीचे का जल एक स्थान में इकट्ठा हो जाए, और सूखी भूमि दिखाई दे।” और ऐसा ही हो गया।

उन्होंने सूखी भूमि को “थल” और इकट्ठे हुए जल को “समुद्र” नाम दिया। और उन्होंने देखा कि यह अच्छा है।

तब उन्होंने कहा, “भूमि हरियाली उगाए: बीजवाले पौधे, और फलदाई वृक्ष जिनके फल में उन्हीं की जाति के अनुसार बीज हों।” और ऐसा ही हो गया।

भूमि ने हरियाली उगाई—अपनी-अपनी जाति के अनुसार बीजवाले पौधे, और अपनी-अपनी जाति के अनुसार बीजवाले फल देनेवाले वृक्ष—और हमारे परमपिता ने देखा कि यह अच्छा है। और सांझ हुई और भोर हुआ—तीसरा दिन।

और हमारे परमपिता ने कहा, “आकाश के अन्तर में ज्योतियां हों, जो दिन को रात से अलग करें, और चिन्हों के लिए तथा ऋतुओं, दिनों और वर्षों को नियुक्त करने के लिए काम आएं, और वे आकाश के अन्तर में ज्योतियां ठहरें, जो पृथ्वी पर उजियाला दें।” और ऐसा ही हो गया।

हमारे परमपिता ने दो बड़ी ज्योतियां बनाईं—बड़ी ज्योति दिन पर प्रभुता करने के लिए, और छोटी ज्योति रात पर प्रभुता करने के लिए। उन्होंने तारों को भी बनाया। उन्होंने उन्हें आकाश के अन्तर में स्थापित किया, कि वे पृथ्वी पर उजियाला दें, और दिन तथा रात पर प्रभुता करें, और उजियाले को अंधकार से अलग करें। और उन्होंने देखा कि यह अच्छा है। इस प्रकार सांझ हुई और भोर हुआ—चौथा दिन।

तब हमारे परमपिता ने कहा, “जल जीवित प्राणियों से भर जाए, और पक्षी पृथ्वी के ऊपर, आकाश के अन्तर में उड़ें।”

इस प्रकार उन्होंने बड़े-बड़े समुद्री जीवों की, और जल में अपनी-अपनी जाति के अनुसार चलने-फिरनेवाले सब जीवित प्राणियों की, और अपनी-अपनी जाति के अनुसार सब पंखवाले पक्षियों की सृष्टि की। और उन्होंने देखा कि यह अच्छा है।

हमारे परमपिता ने उन्हें आशीष देकर कहा, “फूलो-फलो, बढ़ो, समुद्रों के जल को भर दो, और पक्षी पृथ्वी पर बढ़ जाएं।”

और सांझ हुई और भोर हुआ—पांचवां दिन।

और हमारे परमपिता ने कहा, “भूमि अपनी-अपनी जाति के अनुसार जीवित प्राणी उत्पन्न करे: घरेलू पशु, रेंगनेवाले जन्तु, और वनपशु, अपनी-अपनी जाति के अनुसार।” और ऐसा ही हो गया।

उन्होंने वनपशुओं को उनकी जाति के अनुसार, घरेलू पशुओं को उनकी जाति के अनुसार, और भूमि पर रेंगनेवाले सब जन्तुओं को उनकी जाति के अनुसार बनाया। और उन्होंने देखा कि यह अच्छा है।

तब हमारे परमपिता ने कहा, “हम मनुष्य को अपने स्वरूप में, अपनी समानता के अनुसार बनाएं, कि वे समुद्र की मछलियों पर, आकाश के पक्षियों पर, घरेलू पशुओं पर, सारी पृथ्वी पर, और भूमि पर रेंगनेवाले सब जन्तुओं पर प्रभुता करें।” b b v26 परमपिता का “हम” और “अपने” कहना पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा की ओर संकेत करता है।

इस प्रकार हमारे परमपिता ने मनुष्य को अपने ही स्वरूप में सृजा; परमेश्वर के स्वरूप में उसने उसे सृजा; नर और नारी करके उसने उन्हें सृजा। c c v27 यहां ‘परमेश्वर’ एलोहीम है। नया नियम इस एक परमेश्वर को परमपिता, पुत्र, और पवित्र आत्मा के रूप में प्रकट करता है (मत्ती 28:19; यूहन्ना 1:1-3; कुलुस्सियों 1:15-16)।

हमारे परमपिता ने उन्हें आशीष देकर कहा, “फूलो-फलो, बढ़ो, पृथ्वी को भर दो और उसे अपने वश में कर लो। समुद्र की मछलियों पर, आकाश के पक्षियों पर, और पृथ्वी पर चलने-फिरनेवाले सब जीवित प्राणियों पर प्रभुता करो।” तब उन्होंने कहा, “सारी पृथ्वी पर के सब बीजवाले पौधे और सब बीजवाले फलदाई वृक्ष मैं तुम्हें देता हूं—ये तुम्हारा आहार होंगे। और पृथ्वी के सब पशुओं को, आकाश के सब पक्षियों को, और भूमि पर रेंगनेवाले उन सब को जिनमें जीवन का श्वास है, मैं हरा साग-पात आहार के लिए देता हूं।” और ऐसा ही हो गया।

हमारे परमपिता ने अपने बनाए सब कुछ को देखा, और वह बहुत ही अच्छा था। इस प्रकार सांझ हुई और भोर हुआ—छठवां दिन।