परमपिता की दया की छाप
9 1तब उसने मेरे सुनते हुए ऊँचे शब्द से पुकारा: “हे नगर के अधिकारियो, निकट आओ, और हर एक अपने हाथ में अपना विनाश का हथियार लिए हुए आए।”
2तब छ: पुरुष उत्तर की ओर वाले ऊपरी फाटक से आए, और हर एक अपने हाथ में घातक हथियार लिए हुए था; और उनके बीच सन का वस्त्र पहिने हुए एक पुरुष था, जिसके पास लिखने की दवात थी। वे आकर पीतल की वेदी के पास खड़े हो गए।
3तब हमारे परमपिता का तेज करूब के ऊपर से, जहाँ वह ठहरा हुआ था, उठकर भवन की डेवढ़ी तक आ गया। और उसने उस सन का वस्त्र पहिने हुए पुरुष को पुकारा, जिसके पास लिखने की दवात थी।
4और हमारे परमपिता ने उससे कहा, “यरूशलेम नगर के बीच में से होकर जा, और जो लोग उसमें किए जानेवाले सब घृणित कामों के कारण आहें भरते और कराहते हैं, उनके माथे पर छाप लगा दे।” a a v4 जिन पर बचाव के लिए छाप लगाई जाती है, वे वही हैं जिनका मन अपने चारों ओर के पाप के कारण टूट जाता है — हमारे परमपिता उन बच्चों को बख्श देते और उन पर मुहर लगाते हैं जो उसी बात पर शोक करते हैं जिस पर वह शोक करते हैं।
5और उन दूसरों से उसने मेरे सुनते हुए कहा: “इसके पीछे-पीछे नगर के बीच में से होकर जाओ और मारो। न तुम्हारी आँख किसी को बख्शे, और न तुम तरस खाओ। 6बूढ़े, जवान, कुँवारियाँ, बालक और स्त्रियाँ—सब को मार डालो। परन्तु जिस किसी पर वह छाप हो, उसे न छूना। और मेरे पवित्रस्थान से आरम्भ करो।” तब उन्होंने भवन के सामने के उन पुरनियों से आरम्भ किया।
7फिर उसने उनसे कहा, “भवन को अशुद्ध करो, और आँगनों को मारे हुओं से भर दो। जाओ!” तब वे निकलकर नगर में लोगों को मारने लगे।
8जब वे मार रहे थे, तब मैं ही अकेला रह गया। मैं मुँह के बल गिरकर चिल्ला उठा, “हाय, हे प्रभु परमपिता! क्या तू यरूशलेम पर अपनी जलजलाहट उण्डेलते हुए इस्राएल के सब बचे हुओं को नष्ट कर डालेगा?”
9तब उसने मुझसे कहा: “इस्राएल और यहूदा के घराने का अधर्म बहुत ही बड़ा है। देश खून से भरा हुआ है, और नगर अन्याय से भरा हुआ है, क्योंकि वे कहते हैं, ‘परमेश्वर ने देश को त्याग दिया है; परमेश्वर नहीं देखता।’ 10इसलिए मैं भी न तो उन्हें बख्शूँगा और न उन पर तरस खाऊँगा; मैं उनका चालचलन उन्हीं के सिर पर लौटा दूँगा।”
11तब उस सन का वस्त्र पहिने हुए पुरुष ने, जिसके पास लिखने की दवात थी, यह समाचार लौटाकर दिया: “जैसी तूने मुझे आज्ञा दी थी, वैसा ही मैंने किया है।”