हमारे परमपिता बोलते हैं
20 1तब हमारे परमपिता ने ये सारे वचन कहे:
2“मैं तेरा पिता हूँ, जो तुझे मिस्र देश से, दासत्व के घर से निकाल लाया।
3“मुझे छोड़ किसी और देवता को न मानना।
4“अपने लिए कोई खुदी हुई मूरत न बनाना, न ऊपर आकाश में, न नीचे पृथ्वी पर, और न पृथ्वी के नीचे के जल में की किसी वस्तु की कोई प्रतिमा बनाना। 5उनको दण्डवत् न करना और न उनकी उपासना करना; क्योंकि मैं, तेरा पिता, एक जलन रखनेवाला पिता हूँ, और जो मुझ से बैर रखते हैं उनके बच्चों को माता-पिता के पाप का दण्ड तीसरी और चौथी पीढ़ी तक देता हूँ, 6परन्तु जो मुझ से प्रेम रखते और मेरी आज्ञाओं को मानते हैं, उन हजारों पर वाचा का प्रेम दिखाता हूँ।
7“अपने पिता का नाम व्यर्थ न लेना, क्योंकि जो कोई हमारे परमपिता का नाम व्यर्थ लेता है, उसे वह निर्दोष न ठहराएँगे।
8“विश्रामदिन को पवित्र मानने के लिए स्मरण रखना। 9छ: दिन तक परिश्रम करके अपना सारा काम-काज करना, 10परन्तु सातवाँ दिन तेरे पिता के लिए विश्रामदिन है। उस दिन तू कोई काम न करना—न तू, न तेरा बेटा, न तेरी बेटी, न तेरा दास, न तेरी दासी, न तेरे पशु, और न तेरे फाटकों के भीतर रहनेवाला परदेशी। 11क्योंकि हमारे परमपिता ने छ: दिन में आकाश, पृथ्वी, समुद्र, और उन में की सब वस्तुएँ बनाईं, और सातवें दिन विश्राम किया; इसी कारण हमारे परमपिता ने विश्रामदिन को आशीष देकर पवित्र ठहराया।
12“अपने पिता और अपनी माता का आदर करना, ताकि जो देश तेरा पिता तुझे देता है उस में तेरी आयु लम्बी हो।
13“हत्या न करना।
14“व्यभिचार न करना।
15“चोरी न करना।
16“अपने पड़ोसी के विरुद्ध झूठी गवाही न देना।
17“अपने पड़ोसी के घर का लालच न करना। न अपने पड़ोसी की पत्नी का, न उसके दास का, न उसकी दासी का, न उसके बैल का, न उसके गदहे का, और न अपने पड़ोसी की किसी वस्तु का लालच करना।”
18सब लोगों ने बादल की गरज, बिजली की चमक, नरसिंगे का शब्द, और पर्वत से धुआँ उठते देखा। यह देखकर वे काँप उठे और दूर खड़े रहे।
19उन्होंने मूसा से कहा, “तू ही हम से बातें कर, और हम सुनेंगे। परन्तु हमारे परमपिता हम से बातें न करें, नहीं तो हम मर जाएँगे।”
20मूसा ने लोगों से कहा, “मत डरो; हमारे परमपिता तुम्हें परखने आए हैं, ताकि उनका भय तुम्हारे मन में बना रहे और तुम पाप न करो।” 21लोग दूर ही खड़े रहे, परन्तु मूसा उस घोर अन्धकार के निकट गया जहाँ हमारे परमपिता थे।
मूसा निकट आता है
22तब हमारे परमपिता ने मूसा से कहा, “इस्राएलियों से यह कह: तुम ने आप ही देखा है कि मैं ने स्वर्ग से तुम से बातें कीं। 23मेरे साथ रखने के लिए चाँदी के देवता न बनाना, और न अपने लिए सोने के देवता बनाना। 24मेरे लिए मिट्टी की एक वेदी बनाना, और उस पर अपनी भेड़-बकरियों और गाय-बैलों के होमबलि और मेलबलि चढ़ाना। जिस-जिस स्थान में मैं अपने नाम का स्मरण कराऊँगा, वहाँ मैं तेरे पास आकर तुझे आशीष दूँगा। 25यदि तू मेरे लिए पत्थरों की वेदी बनाए, तो उसे गढ़े हुए पत्थरों से न बनाना, क्योंकि जहाँ तू ने अपना औजार उस पर चलाया, वहाँ तू ने उसे अशुद्ध कर दिया। 26मेरी वेदी पर सीढ़ियों से न चढ़ना, ऐसा न हो कि उस पर तेरा नंगापन प्रगट हो जाए।”