एक और विपत्ति
11 1हमारे परमपिता ने मूसा से कहा, “एक और विपत्ति मैं फ़िरौन और मिस्र पर लाऊँगा। उसके बाद वह तुम्हें यहाँ से जाने देगा; और जब वह ऐसा करेगा, तो तुम्हें पूरी तरह से खदेड़ ही देगा। 2लोगों से कह दे: हर पुरुष अपने पड़ोसी से, और हर स्त्री अपनी पड़ोसिन से, चाँदी और सोने की वस्तुएँ माँग ले।”
3और हमारे परमपिता ने मिस्रियों की दृष्टि में लोगों पर अनुग्रह किया। इसके अतिरिक्त, मूसा स्वयं मिस्र देश में, फ़िरौन के सेवकों और लोगों की दृष्टि में, अति महान था।
4मूसा ने कहा, “हमारे परमपिता यों कहते हैं: लगभग आधी रात के समय मैं मिस्र के बीच से होकर निकलूँगा,
5“और मिस्र देश में हर एक पहलौठा मर जाएगा, फ़िरौन के पहलौठे से लेकर, जो उसके सिंहासन पर बैठता है, दासी के उस पहलौठे तक, जो चक्की के पीछे रहता है, और हर एक पशु का पहलौठा भी। 6मिस्र के सारे देश में ऐसा बड़ा हाहाकार मचेगा, जैसा न तो पहले कभी हुआ और न फिर कभी होगा। 7परन्तु इस्राएलियों में से किसी पर, न मनुष्य पर और न पशु पर, कोई कुत्ता तक न गुर्राएगा, जिससे तुम जान लो कि हमारे परमपिता मिस्रियों और इस्राएलियों में भेद करते हैं। 8तेरे ये सब सेवक मेरे पास आकर मुझे दण्डवत करेंगे और कहेंगे, ‘तू और तेरे पीछे चलनेवाले सब लोग निकल जाओ।’ इसके बाद ही मैं निकलूँगा।” तब मूसा फ़िरौन के पास से क्रोध में जलता हुआ निकल गया।
9हमारे परमपिता ने मूसा से कहा, “फ़िरौन तुम्हारी न सुनेगा, जिससे मेरे आश्चर्यकर्म मिस्र देश में बढ़ते जाएँ।”
10मूसा और हारून ने फ़िरौन के सामने ये सब आश्चर्यकर्म किए, परन्तु हमारे परमपिता ने फ़िरौन का मन कठोर कर दिया, और उसने इस्राएलियों को अपने देश से जाने न दिया।