अपने परमपिता को स्मरण रखो, जो सब कुछ देते हैं
8 1जो-जो आज्ञा मैं आज तुम्हें दे रहा हूँ, उन सब का ध्यान से पालन करना, कि तुम जीवित रहो, बढ़ो, और उस देश में प्रवेश करके उसके अधिकारी हो जाओ, जिसकी शपथ हमारे परमपिता ने तुम्हारे पूर्वजों से खाई थी। 2स्मरण रख कि इन चालीस वर्षों में तुम्हारे परमपिता ने तुझे जंगल में किस-किस मार्ग से चलाया, कि वह तुझे दीन करके परखे, और यह जाने कि तेरे मन में क्या है, कि तू उसकी आज्ञाओं का पालन करेगा या नहीं। 3उसने तुझे दीन किया, भूखा होने दिया, और फिर तुझे मन्ना खिलाया, जिसे न तो तू और न तेरे पूर्वज जानते थे, कि वह तुझे सिखाए कि मनुष्य केवल रोटी ही से नहीं, परन्तु हमारे परमपिता के मुख से निकलनेवाले हर एक वचन से जीवित रहता है। 4इन चालीस वर्षों में न तो तेरे तन के वस्त्र पुराने हुए और न तेरे पाँव फूले। 5सो अपने मन में यह जान ले कि जैसे मनुष्य अपने पुत्र को अनुशासित करता है, वैसे ही तुम्हारे परमपिता तुझे अनुशासित करते हैं। 6इसलिए अपने परमपिता की आज्ञाओं का पालन करते हुए उसके मार्गों पर चल और उसका भय मान। 7क्योंकि तुम्हारे परमपिता तुझे एक अच्छे देश में पहुँचा रहे हैं—ऐसा देश जहाँ जल की धाराएँ, सोते, और गहरे जल हैं, जो तराइयों और पहाड़ों में बहते हैं; 8ऐसा देश जहाँ गेहूँ, जौ, दाखलताएँ, अंजीर, और अनार होते हैं; ऐसा देश जहाँ जैतून का तेल और मधु है। 9ऐसा देश जहाँ तू बिना घटी के रोटी खाएगा, और तुझे किसी वस्तु की कमी न होगी—ऐसा देश जिसके पत्थर लोहे के हैं, और जिसके पहाड़ों में से तू ताँबा खोदकर निकालेगा। 10जब तू खाकर तृप्त हो जाए, तब उस अच्छे देश के लिए जो तुम्हारे परमपिता ने तुझे दिया है, अपने परमपिता को धन्य कहना।
11सावधान रह, कहीं ऐसा न हो कि तू अपने परमपिता को भूल जाए, और उसकी आज्ञाओं, नियमों, और विधियों को जो मैं आज तुझे सुनाता हूँ, न माने, 12ऐसा न हो कि जब तू खाकर तृप्त हो जाए, और अच्छे-अच्छे घर बनाकर उनमें रहने लगे, 13और तेरे गाय-बैल और भेड़-बकरियाँ बढ़ जाएँ, और तेरा सोना-चाँदी बढ़ जाए, और तेरा सब कुछ बढ़ जाए, 14तब तेरा मन घमण्ड से भर जाए, और तू अपने परमपिता को भूल जाए, जो तुझे मिस्र देश से, अर्थात् दासत्व के घर से निकाल लाए, 15जो तुझे उस विशाल और भयानक जंगल में से ले आए, जहाँ विषैले साँप और बिच्छू थे, और जहाँ सूखा था और जल नहीं था, और जो तेरे लिए चकमक की चट्टान में से जल निकाल लाए, 16जो जंगल में तुझे मन्ना खिलाते रहे, जिसे तेरे पूर्वज नहीं जानते थे, कि वह तुझे दीन करके परखे, और अन्त में तेरा भला करे। 17चौकस रह—अपने मन में यह न कहना, “मेरे ही सामर्थ्य और मेरे ही हाथ के बल ने मेरे लिए यह धन कमाया है।” 18अपने परमपिता को स्मरण रख, क्योंकि वही तुझे धन कमाने का सामर्थ्य देते हैं, कि वह अपनी वाचा को, जिसकी शपथ उसने तेरे पूर्वजों से खाई थी, स्थिर रखे, जैसा आज के दिन है।
19परन्तु यदि तू कभी अपने परमपिता को भूलकर पराए देवताओं के पीछे चले, और उनकी उपासना करके उन्हें दण्डवत् करे, तो मैं आज तुम्हारे विरुद्ध साक्षी देता हूँ कि तुम निश्चय नष्ट हो जाओगे। 20जिन जातियों को हमारे परमपिता तुम्हारे सामने से नष्ट करते हैं, उन्हीं के समान तुम भी नष्ट हो जाओगे, क्योंकि तुमने अपने परमपिता की बात नहीं मानी।