ओग युद्ध करने निकलता है
3 1फिर हम मुड़कर बाशान के मार्ग पर चल पड़े, और बाशान के राजा ओग ने अपनी सारी प्रजा समेत हमसे युद्ध करने के लिए एद्रेई में हमारा सामना किया।
2और हमारे परमपिता ने मुझसे कहा, “उससे मत डर, क्योंकि मैंने उसे, उसकी सारी प्रजा और उसका देश तेरे हाथ में कर दिया है; जैसा तूने हेशबोन में रहनेवाले एमोरियों के राजा सीहोन के साथ किया, वैसा ही उसके साथ भी कर।”
3अतः हमारे परमपिता ने बाशान के राजा ओग को और उसकी सारी प्रजा को भी हमारे हाथ में कर दिया, और हमने उन्हें ऐसा मारा कि कोई भी जीवित न बचा। 4उस समय हमने उसके सारे नगर ले लिए—सब के सब साठ नगर, एक भी न छूटा—अर्गोब का सारा क्षेत्र, जो बाशान में ओग का राज्य था। 5ये सब नगर ऊँची शहरपनाहों और बेंड़ोंवाले फाटकों से गढ़वाले थे, और इनके अतिरिक्त बिना शहरपनाह के बहुत से गाँव भी थे। 6हमने उनका सत्यानाश कर डाला, जैसा हेशबोन के राजा सीहोन के साथ किया था, हर एक नगर के पुरुषों, स्त्रियों और बाल-बच्चों समेत उसका सत्यानाश कर दिया। 7परन्तु सब पशुओं और नगरों की लूट को हमने अपने लिए ले लिया। 8इस प्रकार उस समय हमने यरदन पार के एमोरियों के इन दोनों राजाओं के हाथ से वह देश ले लिया, जो अर्नोन की घाटी से लेकर हेर्मोन पर्वत तक है 9(हेर्मोन को सीदोनी लोग सिर्योन कहते हैं, और एमोरी लोग उसे सनीर कहते हैं), 10अर्थात् पठार के सब नगर, सारा गिलाद, और सलका और एद्रेई तक सारा बाशान, जो बाशान में ओग के राज्य के नगर थे। 11(रपाईम के बचे हुओं में से केवल बाशान का राजा ओग रह गया था। उसकी खाट लोहे की खाट थी; क्या वह अम्मोनियों के रब्बा नगर में नहीं है? वह लगभग साढ़े तेरह फुट लम्बी और छह फुट चौड़ी थी।)। a a v11 रपाईम दानवाकार योद्धाओं की एक पौराणिक जाति थी, जो कभी कनान में रहा करती थी।
यरदन के पूर्व में भूमि का बँटवारा
12उस समय हमने यह देश अपने अधिकार में कर लिया: अर्नोन की घाटी के किनारे बसे अरोएर से लेकर गिलाद के पहाड़ी देश का आधा भाग और उसके नगर, मैंने रूबेनियों और गादियों को दे दिए। 13और गिलाद का बचा हुआ भाग, और सारा बाशान, जो ओग का राज्य था, मैंने मनश्शे के आधे गोत्र को दे दिया, अर्थात् अर्गोब का सारा क्षेत्र। (बाशान का वह सारा भाग रपाईम का देश कहलाता था। 14मनश्शे के पुत्र याईर ने गशूरियों और माकावासियों की सीमा तक अर्गोब का सारा क्षेत्र ले लिया, और बाशान को अपने नाम पर हब्बोत्याईर कहा, जो आज तक यही कहलाता है।)। 15और मैंने माकीर को गिलाद दे दिया। 16और रूबेनियों और गादियों को मैंने गिलाद से लेकर अर्नोन की घाटी तक—जिसका बीच का भाग सीमा है—और यब्बोक नदी तक, जो अम्मोनियों की सीमा है, दे दिया। 17और अराबा भी, जिसकी सीमा यरदन है, किन्नेरेत से लेकर अराबा के ताल (अर्थात् खारे ताल) तक, पिसगा की ढलानों के नीचे, पूर्व की ओर।
18उस समय मैंने तुम्हें यह आज्ञा दी: “तुम्हारे परमपिता ने तुम्हें यह देश अधिकार में लेने के लिए दिया है; तुम्हारे सब योद्धा हथियार बाँधकर अपने भाई इस्राएलियों के आगे-आगे पार जाएँ। 19केवल तुम्हारी स्त्रियाँ, बाल-बच्चे और पशु—मैं जानता हूँ कि तुम्हारे पास बहुत से पशु हैं—मेरे दिए हुए नगरों में रहें, 20जब तक हमारे परमपिता तुम्हारे भाइयों को भी वैसा ही विश्राम न दें जैसा तुम्हें दिया है, और वे भी उस देश को अधिकार में न कर लें जो तुम्हारे परमपिता उन्हें यरदन पार दे रहे हैं। तब तुम में से हर एक अपने-अपने उस अधिकार में लौट जाए जो मैंने तुम्हें दिया है।”
21उस समय मैंने यहोशू को आज्ञा दी: “तूने अपनी ही आँखों से वह सब देखा है जो तुम्हारे परमपिता ने इन दोनों राजाओं से किया। तुम्हारे परमपिता उन सब राज्यों से भी ऐसा ही करेंगे, जिनमें तू पार जा रहा है।
मत डरो — वह तुम्हारे लिए युद्ध करता है
22उनसे मत डर, क्योंकि तुम्हारे परमपिता स्वयं तुम्हारे लिए युद्ध करते हैं।”
23और उस समय मैंने हमारे परमपिता से विनती करके कहा, 24“हे मेरे सार्वभौम परमपिता, आपने अपने दास को अपनी महानता और अपना बलवन्त हाथ दिखाना आरम्भ किया है। स्वर्ग या पृथ्वी में ऐसा कौन-सा ईश्वर है जो आपके समान काम और पराक्रम के कार्य कर सके? 25कृपया मुझे भी पार जाकर यरदन पार के उस अच्छे देश को देखने दीजिए, इस सुन्दर पहाड़ी देश को, और लबानोन को।”
26परन्तु हमारे परमपिता तुम्हारे कारण मुझ पर क्रोधित थे और उन्होंने मेरी न सुनी; हमारे परमपिता ने मुझसे कहा, “बस! अब इस विषय में मुझसे फिर बात न करना। 27पिसगा की चोटी पर चढ़ जा, और अपनी आँखें उठाकर पश्चिम, उत्तर, दक्षिण और पूर्व की ओर देख, और अपनी ही आँखों से उसे देख ले, क्योंकि तू इस यरदन को पार नहीं करेगा। 28परन्तु यहोशू को अधिकार सौंप दे, उसे प्रोत्साहित कर और दृढ़ कर, क्योंकि वह इस प्रजा के आगे-आगे पार जाएगा और उन्हें वह देश अधिकार में करा देगा जिसे तू देखेगा।”
29अतः हम बेत्पोर के सामनेवाली घाटी में ठहरे रहे।