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व्यवस्थाविवरण 28

पुस्तक

पिता की अपने बच्चों से प्रतिज्ञा

अध्याय 28।

यदि तुम मन लगाकर अपने परमपिता की वाणी सुनो, और उसकी उन सब आज्ञाओं को मानने में सावधान रहो जो मैं आज तुम्हें देता हूँ, तो तुम्हारे परमपिता तुम्हें पृथ्वी की सब जातियों से ऊँचा ठहराएँगे। और ये सब आशीषें तुम पर आ पड़ेंगी और तुम्हें प्राप्त होंगी, यदि तुम अपने परमपिता की वाणी सुनो: धन्य होगे तुम नगर में, और धन्य होगे तुम खेत में। धन्य होगा तुम्हारे गर्भ का फल, तुम्हारी भूमि की उपज, और तुम्हारे पशुओं का फल—तुम्हारे गाय-बैलों और भेड़-बकरियों के बच्चे। धन्य होगी तुम्हारी टोकरी और तुम्हारी कठौती। धन्य होगे तुम भीतर आते समय, और धन्य होगे तुम बाहर जाते समय। तुम्हारे परमपिता उन शत्रुओं को जो तुम्हारे विरुद्ध उठें तुम्हारे सामने मार गिराएँगे। वे एक ही मार्ग से तुम पर चढ़ाई करेंगे, परन्तु सात मार्गों से तुम्हारे सामने से भाग जाएँगे। तुम्हारे परमपिता तुम्हारे खत्तों में और जिस-जिस काम में तुम हाथ लगाओगे उन सब में आशीष की आज्ञा देंगे, और उस देश में जो तुम्हारे परमपिता तुम्हें देते हैं तुम्हें आशीष देंगे। तुम्हारे परमपिता तुम्हें अपने लिए एक पवित्र प्रजा ठहराएँगे, जैसा उन्होंने तुमसे शपथ खाई है, यदि तुम अपने परमपिता की आज्ञाओं को मानो और उसके मार्गों पर चलो। तब पृथ्वी के सब लोग यह देखेंगे कि तुम हमारे परमपिता के नाम से कहलाते हो, और वे तुमसे डरेंगे। तुम्हारे परमपिता तुम्हें समृद्धि से भर देंगे—तुम्हारे गर्भ के फल में, तुम्हारे पशुओं के फल में, और तुम्हारी भूमि की उपज में—उस देश में जिसे देने की शपथ तुम्हारे परमपिता ने तुम्हारे पूर्वजों से खाई थी। तुम्हारे परमपिता तुम्हारे लिए अपना उत्तम भण्डार, अर्थात् आकाश, खोलेंगे, कि तुम्हारे देश को समय पर वर्षा दें और तुम्हारे हाथों के सब कामों पर आशीष दें। तुम बहुत सी जातियों को उधार दोगे, परन्तु स्वयं उधार न लोगे। तुम्हारे परमपिता तुम्हें पूँछ नहीं, वरन् सिर ठहराएँगे, और तुम सदा ऊपर ही रहोगे, कभी नीचे न होगे, यदि तुम अपने परमपिता की उन आज्ञाओं को जो मैं आज तुम्हें देता हूँ सुनकर सावधानी से मानो। जो-जो वचन मैं आज तुम्हें आज्ञा देता हूँ उनमें से किसी से न तो दाहिनी ओर मुड़ना न बाईं ओर, कि तुम पराए देवताओं के पीछे चलकर उनकी उपासना करो।

जब वे भटक जाएँ

परन्तु यदि तुम अपने परमपिता की वाणी न सुनो, और उसकी उन सब आज्ञाओं और विधियों को जो मैं आज तुम्हें देता हूँ सावधानी से न मानो, तो ये सब शाप तुम पर आ पड़ेंगे और तुम्हें प्राप्त होंगे: a a v15 ये चेतावनियाँ किसी दूर के न्यायी की नहीं, वरन् एक पिता के हृदय से निकली हैं—ये शाप उस विनाश का वर्णन करते हैं जो सृजनहार की रचना के विरुद्ध जीए गए जीवन के पीछे आता है, और हमारे परमपिता इन्हें बताते हुए भी इन पर शोक करते हैं। शापित होगे तुम नगर में, और शापित होगे तुम खेत में। शापित होगी तुम्हारी टोकरी और तुम्हारी कठौती। शापित होगा तुम्हारे गर्भ का फल और तुम्हारी भूमि की उपज, तुम्हारे गाय-बैलों की बढ़ती और तुम्हारी भेड़-बकरियों के बच्चे। शापित होगे तुम भीतर आते समय, और शापित होगे तुम बाहर जाते समय। जिस-जिस काम में तुम हाथ लगाओगे उन सब में तुम्हारे परमपिता तुम पर शाप, घबराहट और झिड़की भेजेंगे, जब तक तुम नाश न हो जाओ और शीघ्र मिट न जाओ, यह तुम्हारे उन बुरे कामों के कारण होगा जिनके द्वारा तुमने मुझे त्याग दिया। तुम्हारे परमपिता ऐसा करेंगे कि मरी तुमसे लिपटी रहे, जब तक कि वे तुम्हें उस देश में से जिसके अधिकारी होने को तुम जा रहे हो नाश न कर दें। तुम्हारे परमपिता तुम्हें क्षयरोग, ज्वर, जलन, दाह, सूखा, झुलस और गेरुई से मारेंगे; और ये तुम्हारे नाश हो जाने तक तुम्हारा पीछा करेंगे। तुम्हारे सिर के ऊपर का आकाश पीतल का, और तुम्हारे नीचे की भूमि लोहे की हो जाएगी। तुम्हारे परमपिता तुम्हारे देश की वर्षा को धूल और रेत बना देंगे; वह आकाश से तुम पर तब तक बरसेगी जब तक तुम नाश न हो जाओ। तुम्हारे परमपिता तुम्हें तुम्हारे शत्रुओं के सामने मार खिलाएँगे। तुम एक ही मार्ग से उन पर चढ़ाई करने को निकलोगे, परन्तु सात मार्गों से भाग जाओगे, और तुम पृथ्वी के सब राज्यों के लिए भय का कारण बन जाओगे। तुम्हारी लोथें आकाश के सब पक्षियों और पृथ्वी के पशुओं का आहार होंगी, और उन्हें भगानेवाला कोई न होगा। तुम्हारे परमपिता तुम्हें मिस्र के फोड़ों, गिलटियों, चढ़ते घावों और खुजली से मारेंगे, जिनमें से कोई भी चंगा नहीं हो सकता। तुम्हारे परमपिता तुम्हें पागलपन, अंधेपन और मन की घबराहट से मारेंगे। दोपहर को तुम अंधे के समान अंधकार में टटोलते फिरोगे, और अपने मार्गों में सफल न होगे। तुम सदा केवल पिसे और लुटे जाओगे, और तुम्हें बचानेवाला कोई न होगा। तुम किसी स्त्री से मँगनी करोगे, परन्तु कोई दूसरा पुरुष उससे सोएगा। तुम घर बनाओगे, परन्तु उसमें न बसोगे। तुम दाख की बारी लगाओगे, परन्तु उसका फल न भोगोगे। तुम्हारा बैल तुम्हारी आँखों के सामने बलि किया जाएगा, परन्तु तुम उसका मांस न खाओगे। तुम्हारा गदहा तुम्हारे सामने से छीन लिया जाएगा और तुम्हें फिर न मिलेगा। तुम्हारी भेड़-बकरियाँ तुम्हारे शत्रुओं को दे दी जाएँगी, और तुम्हें छुड़ानेवाला कोई न होगा। तुम्हारे बेटे-बेटियाँ दूसरे लोगों को दे दिए जाएँगे, और तुम्हारी आँखें उनको देखते-देखते और दिन भर उनके लिए तरसते-तरसते रह जाएँगी, परन्तु तुम्हारे हाथ में कुछ बस न चलेगा। जिस जाति को तुम नहीं जानते वह तुम्हारी भूमि की उपज और तुम्हारे सब परिश्रम का फल खा जाएगी; और तुम सदा केवल पिसे और कुचले जाओगे। और जो कुछ तुम्हारी आँखें देखेंगी उसके कारण तुम पागल हो जाओगे। तुम्हारे परमपिता तुम्हारे घुटनों और टाँगों पर, वरन् पाँव के तलवे से लेकर सिर की चोटी तक, ऐसे भयंकर फोड़ों से मारेंगे जो चंगे नहीं हो सकते। तुम्हारे परमपिता तुम्हें और तुम्हारे उस राजा को जिसे तुम अपने ऊपर ठहराओगे, ऐसी जाति के बीच पहुँचा देंगे जिसे न तो तुमने और न तुम्हारे पूर्वजों ने जाना था, और वहाँ तुम काठ और पत्थर के पराए देवताओं की उपासना करोगे। जिन-जिन लोगों में तुम्हारे परमपिता तुम्हें पहुँचाएँगे, उन सभों के बीच तुम भय का कारण, कहावत और उपहास ठहरोगे। तुम खेत में बहुत सा बीज ले जाओगे, परन्तु थोड़ा ही काटोगे, क्योंकि टिड्डियाँ उसे खा जाएँगी। तुम दाख की बारियाँ लगाकर उनकी सेवा-टहल करोगे, परन्तु न तो दाखमधु पीओगे और न दाख बटोरोगे—क्योंकि उन्हें कीड़े खा जाएँगे। तुम्हारे सारे देश में जैतून के वृक्ष तो होंगे, परन्तु तुम उनके तेल से अपना अभिषेक न कर पाओगे, क्योंकि तुम्हारे जैतून झड़ जाएँगे। तुम्हारे बेटे-बेटियाँ तो उत्पन्न होंगे, परन्तु वे तुम्हारे न रहेंगे, क्योंकि वे बन्धुआई में चले जाएँगे। तुम्हारे सब वृक्षों और तुम्हारी भूमि की उपज पर टिड्डियाँ अधिकार कर लेंगी। तुम्हारे बीच रहनेवाला परदेशी तुमसे बढ़ते-बढ़ते और ऊँचा होता जाएगा, और तुम घटते-घटते और नीचे होते जाओगे। वह तुम्हें उधार देगा, परन्तु तुम उसे उधार न दे सकोगे; वह सिर, और तुम पूँछ ठहरोगे।

ये सब शाप तुम पर आ पड़ेंगे, और तुम्हारा पीछा करके तुम्हें तब तक प्राप्त होते रहेंगे जब तक तुम नाश न हो जाओ, क्योंकि तुमने अपने परमपिता की वाणी को न सुना कि उसकी आज्ञाओं और विधियों को मानो जो उसने तुम्हें दी थीं। वे तुम्हारे और तुम्हारे वंश के विरुद्ध सदा के लिए चिन्ह और चमत्कार ठहरेंगे। जब तुम्हारे पास सब वस्तुओं की बहुतायत थी, तब तुमने आनन्द और प्रसन्न मन से अपने परमपिता की सेवा न की, इस कारण तुम भूख, प्यास, नंगेपन और घोर दरिद्रता में अपने उन शत्रुओं की सेवा करोगे जिन्हें तुम्हारे परमपिता तुम्हारे विरुद्ध भेजेंगे। वे तुम्हारे नाश हो जाने तक तुम्हारी गर्दन पर लोहे का जूआ रखेंगे। तुम्हारे परमपिता तुम्हारे विरुद्ध दूर से, वरन् पृथ्वी की छोर से, ऐसी जाति को चढ़ा लाएँगे जो उकाब के समान झपटती हो—ऐसी जाति जिसकी भाषा तुम न समझोगे, वह जाति क्रूर मुखवाली होगी, जो न तो बूढ़ों का आदर करेगी और न बालकों पर दया। वह तुम्हारे पशुओं के बच्चों और तुम्हारी भूमि की उपज को तब तक खाती रहेगी जब तक तुम नाश न हो जाओ, और वह तुम्हारे लिए न अन्न, न नया दाखमधु, न तेल, न तुम्हारे गाय-बैलों के बच्चे, न तुम्हारी भेड़-बकरियों के बच्चे छोड़ेगी, जब तक कि वह तुम्हें मिटा न दे। वह तुम्हारे सारे देश में तुम्हारे सब नगरों को तब तक घेरे रहेगी जब तक तुम्हारी वे ऊँची और गढ़वाली शहरपनाहें जिन पर तुम भरोसा रखते हो गिर न जाएँ। वह तुम्हारे उस सारे देश में जो तुम्हारे परमपिता ने तुम्हें दिया है तुम्हारे सब नगरों के भीतर तुम्हें घेरे रहेगी। तब उस घेराबन्दी और संकट में जो तुम्हारा शत्रु तुम पर डालेगा, तुम अपने ही गर्भ का फल, अर्थात् अपने उन बेटे-बेटियों का मांस खाओगे जिन्हें तुम्हारे परमपिता ने तुम्हें दिया है। तुम्हारे बीच का जो पुरुष अति कोमल और सुकुमार हो, वह भी अपने भाई, अपनी प्रिय पत्नी और अपने बचे हुए बच्चों पर कुदृष्टि करेगा, और उनमें से किसी को भी अपने बच्चों का वह मांस जो वह खाता होगा न देगा, क्योंकि उस घेराबन्दी और संकट में जो तुम्हारा शत्रु तुम्हारे सब नगरों के भीतर तुम पर डालेगा उसके पास और कुछ भी शेष न रहेगा। तुम्हारे बीच की जो स्त्री ऐसी कोमल और सुकुमार हो कि सुकुमारपन के मारे अपने पाँव का तलवा तक भूमि पर न धरती हो, वह भी अपने प्रिय पति और अपने ही बेटे-बेटी पर कुदृष्टि करेगी, वरन् अपने पाँवों के बीच से निकली हुई खेड़ी पर और अपने जने हुए बालकों पर भी, क्योंकि उस घेराबन्दी और संकट में जो तुम्हारा शत्रु तुम्हारे नगरों के भीतर तुम पर डालेगा, वह और कुछ न होने के कारण उन्हें छिपकर खा जाएगी। यदि तुम इस पुस्तक में लिखी हुई इस व्यवस्था के सब वचनों को मानने में सावधानी न करो, कि इस महिमामय और भययोग्य नाम—अर्थात् परमपिता—का भय मानो, तो तुम्हारे परमपिता तुम पर और तुम्हारे वंश पर अनोखी विपत्तियाँ—अर्थात् बड़ी और स्थायी विपत्तियाँ, और भयंकर और स्थायी रोग—लाएँगे। वे मिस्र के उन सब रोगों को जिनसे तुम भय खाते थे तुम पर फिर से लाएँगे, और वे तुमसे लिपटे रहेंगे। और हर एक रोग और विपत्ति भी जो इस व्यवस्था की पुस्तक में नहीं लिखी है, तुम्हारे परमपिता तुम पर तब तक लाते रहेंगे जब तक तुम नाश न हो जाओ। तुम जो आकाश के तारों के समान अनगिनत थे, थोड़े ही रह जाओगे, क्योंकि तुमने अपने परमपिता की वाणी को न सुना। जैसे तुम्हारे परमपिता तुम्हारी भलाई करने और तुम्हें बढ़ाने में आनन्दित होते थे, वैसे ही अब तुम्हारे परमपिता तुम्हें नष्ट करने और मिटा देने में आनन्दित होंगे, और तुम उस देश में से जिसके अधिकारी होने को जा रहे हो उखाड़ दिए जाओगे। तुम्हारे परमपिता तुम्हें पृथ्वी के एक छोर से दूसरे छोर तक सब लोगों के बीच तितर-बितर करेंगे, और वहाँ तुम काठ और पत्थर के ऐसे पराए देवताओं की उपासना करोगे जिन्हें न तो तुमने और न तुम्हारे पूर्वजों ने जाना था। उन जातियों के बीच तुम्हें कहीं चैन न मिलेगा, और न तुम्हारे पाँव के तलवे को कहीं विश्राम मिलेगा। वहाँ तुम्हारे परमपिता तुम्हें काँपता हुआ हृदय, धुँधलाती आँखें और निराश प्राण देंगे। तुम्हारा प्राण संदेह में तुम्हारे सामने लटका रहेगा; रात-दिन तुम भय खाते रहोगे, और अपने जीवन का कुछ भरोसा न रहेगा। अपने हृदय में समाए भय के कारण और उन दृश्यों के कारण जो तुम्हारी आँखें देखेंगी, तुम सवेरे कहोगे, “भला होता कि साँझ होती!” और साँझ को कहोगे, “भला होता कि सवेरा होता!” तुम्हारे परमपिता तुम्हें जहाजों में बैठाकर उसी मार्ग से मिस्र में फिर पहुँचा देंगे जिसके विषय में मैंने कहा था कि उसे तुम फिर कभी न देखोगे। वहाँ तुम अपने शत्रुओं के हाथ दास-दासियाँ होने के लिये अपने-अपने को बेचना चाहोगे, परन्तु तुम्हें कोई न मोल लेगा।

A young man reading the Father's Heart Bible print edition in a coffee shop अब छपाई में

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