निर्दोष के लिए शरणनगर
19 1जब तुम्हारे परमपिता उन जातियों को नष्ट कर देंगे जिनका देश तुम्हारे परमपिता तुम्हें देते हैं, और तुम उन्हें निकाल दोगे, और उनके नगरों और घरों में बस जाओगे, 2तब उस देश में जिसे तुम्हारे परमपिता तुम्हें अधिकार में लेने के लिए दे रहे हैं, तीन नगर अलग कर लेना। 3मार्ग तैयार करना और उस देश को जिसे तुम्हारे परमपिता तुम्हें मीरास में देते हैं, तीन भागों में बाँट देना, जिससे हर एक जो किसी को मार डाले वहाँ भाग सके। 4जो हत्यारा वहाँ भागकर जीवित रह सकता है, उसका ब्योरा यह है: जो अपने पड़ोसी को बिना जानबूझे, और बिना पहले से बैर रखे मार डाले, 5जैसे कोई मनुष्य अपने पड़ोसी के साथ लकड़ी काटने को वन में जाए, और उसका हाथ पेड़ काटने के लिए कुल्हाड़ी चलाए, और लोहे का फल बेंट से निकलकर उसके पड़ोसी को ऐसा लगे कि वह मर जाए—तो वह इन नगरों में से किसी एक में भागकर जीवित रह सकता है। 6नहीं तो खून का पलटा लेनेवाला, क्रोध से जलता हुआ, उस लंबे मार्ग पर उस हत्यारे का पीछा करके उसे जा पकड़े और मार डाले, यद्यपि वह मृत्यु के योग्य न था, क्योंकि उसने पहले अपने पड़ोसी से बैर नहीं रखा था। a a v6 खून का पलटा लेनेवाला मारे गए व्यक्ति का निकटतम संबंधी होता था, जिससे प्राचीन रीति के अनुसार हत्यारे का पीछा करने की आशा की जाती थी; शरणनगर अनजाने में हत्या करनेवाले को इस बदले से तब तक बचाते थे जब तक न्यायपूर्ण मुकद्दमा न हो जाए। 7इसलिए मैं तुझे आज्ञा देता हूँ: अपने लिए तीन नगर अलग कर लेना। 8और यदि तुम्हारे परमपिता तुम्हारी सीमा को बढ़ा दें, जैसा उन्होंने तुम्हारे पूर्वजों से शपथ खाई थी, और वह सारा देश तुम्हें दे दें जिसकी उन्होंने उनसे प्रतिज्ञा की थी— 9यदि तू इस सारी आज्ञा को जो मैं आज तुझे देता हूँ यत्न से माने—अपने परमपिता से प्रेम रखे और सदा उनके मार्गों पर चले—तो इन तीन नगरों में तीन नगर और बढ़ा लेना, 10जिससे उस देश में जिसे तुम्हारे परमपिता तुम्हें मीरास में देते हैं, निर्दोष का खून न बहाया जाए, और खून का दोष तुझ पर न आ पड़े। 11परन्तु यदि कोई मनुष्य अपने पड़ोसी से बैर रखकर घात में बैठे, और उस पर टूटकर उसे ऐसा मारे कि वह मर जाए, और फिर इन नगरों में से किसी एक में भाग जाए, 12तो उसके नगर के पुरनिये किसी को भेजकर उसे वहाँ से मँगवा लें, और उसे खून का पलटा लेनेवाले के हाथ में सौंप दें, कि वह मार डाला जाए। 13उस पर तरस न खाना; इस्राएल में से निर्दोष खून के दोष को दूर करना, कि तेरा भला हो।
अपने पड़ोसी की सीमा का आदर करो
14उस मीरास में जो तू पाएगा, उस देश में जिसे तुम्हारे परमपिता तुम्हें अधिकार में लेने के लिए देते हैं, अपने पड़ोसी की सीमा जिसे पिछली पीढ़ियों ने ठहराया हो, हटाना नहीं।
15किसी मनुष्य के किसी अधर्म या पाप के विषय में, चाहे अपराध कैसा भी हो, एक ही गवाह उसे दोषी नहीं ठहरा सकता। कोई बात दो या तीन गवाहों की गवाही ही से ठहरती है। 16यदि कोई कुटिल गवाह किसी मनुष्य के विरुद्ध खड़ा होकर उस पर किसी बुराई का दोष लगाए, 17तो वे दोनों मनुष्य जिनके बीच झगड़ा हो, तुम्हारे परमपिता के सामने, अर्थात् उन दिनों के याजकों और न्यायियों के सामने खड़े हों। 18और न्यायी भली-भाँति जाँच करें। यदि वह गवाह झूठा निकले, और उसने अपने भाई के विरुद्ध झूठी गवाही दी हो, 19तो जैसा उसने अपने भाई के साथ करने की युक्ति की थी, वैसा ही उसके साथ करना; इस प्रकार अपने बीच में से बुराई को दूर करना। 20तब शेष लोग सुनकर डर जाएँगे, और फिर कभी तेरे बीच में ऐसी बुराई न करेंगे। 21तरस न खाना: प्राण के बदले प्राण, आँख के बदले आँख, दाँत के बदले दाँत, हाथ के बदले हाथ, पाँव के बदले पाँव।