विनाश का पुत्र आ रहा है
2 1हे भाइयो, हमारे प्रभु यीशु मसीह के आगमन और उसके पास हमारे एकत्र होने के विषय में हम तुमसे विनती करते हैं, 2कि तुम न तो अपने मन में जल्दी से डगमगा जाओ और न ही घबराओ—न किसी आत्मा से, न किसी वचन से, और न ही हमारी ओर से होने का दावा करनेवाली किसी पत्री से—यह कहते हुए कि हमारे प्रभु का दिन आ चुका है। 3किसी भी रीति से कोई तुम्हें न भरमाए; क्योंकि वह दिन तब तक नहीं आएगा जब तक पहले विद्रोह न हो जाए और वह अधर्म का पुरुष—जो विनाश के लिये ठहराया गया है—प्रकट न हो जाए, 4जो विरोध करता है और हर एक तथाकथित ईश्वर या पूज्य वस्तु के ऊपर अपने आप को बड़ा ठहराता है, यहाँ तक कि वह परमपिता के मन्दिर में बैठ जाता है और अपने आप को परमेश्वर बताता है। a a v4 यहाँ 'परमेश्वर' शब्द को ज्यों का त्यों रखा गया है क्योंकि यह उस अधर्मी का झूठा, आत्म-प्रशंसात्मक दावा है — उस परमपिता का एक खोटा प्रतिरूप, जिसके विरुद्ध वह अपने आप को खड़ा करता है। 5क्या तुम्हें स्मरण नहीं कि जब मैं तुम्हारे साथ ही था, तब मैंने तुमसे ये बातें कही थीं? 6और अब तुम जानते हो कि इस समय उसे किस बात ने रोक रखा है, ताकि वह अपने ठीक समय पर ही प्रकट हो। 7क्योंकि अधर्म का भेद तो अभी से काम कर रहा है; केवल एक रोकनेवाला अभी है, जो तब तक रोके रहेगा जब तक वह बीच में से उठा न लिया जाए। 8तब वह अधर्मी प्रकट होगा, जिसे प्रभु यीशु अपने मुँह की फूँक से नष्ट कर देगा और अपने आगमन के तेज से विनाश कर देगा। 9वह अधर्मी शैतान के कार्य के अनुसार सारी सामर्थ्य, झूठे चिन्हों और अद्भुत कामों के साथ आएगा, 10और उन लोगों के लिये हर प्रकार के दुष्ट छल के साथ, जो नाश हो रहे हैं, क्योंकि उन्होंने सत्य से प्रेम करके उद्धार पाने से इन्कार किया। 11इसी कारण हमारे परमपिता उन में एक ऐसा प्रबल भ्रम भेजते हैं, कि वे झूठ पर विश्वास करें, 12ताकि वे सब जिन्होंने सत्य पर विश्वास नहीं किया, परन्तु अधर्म से प्रसन्न रहे, दोषी ठहराए जाएँ।
परमपिता के बुलावे में स्थिर बने रहो
13हे भाइयो, प्रभु के प्रिय जनो, हमें तुम्हारे विषय में सदा हमारे परमपिता का धन्यवाद करना चाहिए, क्योंकि हमारे परमपिता ने तुम्हें उद्धार के लिये पहले फल के रूप में चुन लिया, पवित्र आत्मा के पवित्र करनेवाले कार्य और सत्य पर विश्वास के द्वारा। 14इसी के लिये उसने हमारे सुसमाचार के द्वारा तुम्हें बुलाया, ताकि तुम हमारे प्रभु यीशु मसीह की महिमा प्राप्त करो। 15इसलिये हे भाइयो, स्थिर बने रहो और उन शिक्षाओं को थामे रहो जो हमने तुम्हें सिखाईं, चाहे वचन के द्वारा हो या पत्री के द्वारा।
16अब हमारा प्रभु यीशु मसीह स्वयं, और हमारे परमपिता, जिन्होंने हम से प्रेम किया और अनुग्रह के द्वारा हमें अनन्त शान्ति और उत्तम आशा दी, 17तुम्हारे मनों को शान्ति दें और हर एक भले काम और वचन में उन्हें दृढ़ करें।