परमपिता की दाऊद के साथ वाचा
7 1जब राजा अपने भवन में बस गया, और हमारे परमपिता ने उसे चारों ओर के सब शत्रुओं से विश्राम दिया, 2तब राजा ने नातान नबी से कहा, “देख, मैं तो देवदार के भवन में रहता हूँ, परन्तु हमारे परमपिता का सन्दूक तम्बू में रहता है।”
3नातान ने राजा से कहा, “जो कुछ तेरे मन में है, जाकर वह सब कर, क्योंकि हमारे परमपिता तेरे साथ हैं।”
4परन्तु उसी रात हमारे परमपिता का वचन नातान के पास पहुँचा:
5“जाकर मेरे दास दाऊद से कह: तेरे परमपिता यह कहते हैं: ‘क्या तू ही मेरे रहने के लिये भवन बनाएगा? 6जिस दिन से मैं इस्राएल को मिस्र से निकाल लाया, आज के दिन तक मैं किसी भवन में नहीं रहा, वरन तम्बू को अपना निवास बनाकर स्थान-स्थान फिरता रहा हूँ।’ 7जहाँ कहीं मैं समस्त इस्राएल के संग फिरता रहा, क्या मैंने कभी इस्राएल के किसी प्रधान से, जिसे मैंने अपनी प्रजा की चरवाही की आज्ञा दी थी, यह कहा, ‘तुमने मेरे लिये देवदार का भवन क्यों नहीं बनाया?’ 8अब मेरे दास दाऊद से कह: स्वर्ग की सेनाओं के परमपिता यह कहते हैं: ‘मैंने तुझे चराई से, अर्थात भेड़-बकरियों के पीछे-पीछे फिरने से लेकर, अपनी प्रजा इस्राएल पर प्रधान होने के लिये ठहराया। 9जहाँ कहीं तू गया वहाँ मैं तेरे संग रहा, और तेरे सब शत्रुओं को तेरे सामने से नाश किया। और मैं तेरा नाम बड़ा करूँगा, पृथ्वी के बड़े-बड़े लोगों के नाम के समान। 10और मैं अपनी प्रजा इस्राएल के लिये एक स्थान ठहराऊँगा, और उन्हें वहाँ बसाऊँगा कि वे अपने ही स्थान में निडर बसे रहें और फिर न घबराएँ; और कुटिल लोग उन्हें पहले के समान फिर दुःख न देने पाएँगे, 11अर्थात उस समय से जब मैंने अपनी प्रजा इस्राएल पर न्यायी ठहराए थे। और मैं तुझे तेरे सब शत्रुओं से विश्राम दूँगा। फिर तेरे परमपिता तुझे यह भी बताते हैं कि वह स्वयं तेरा घराना स्थापित करेंगे। 12जब तेरी आयु पूरी हो जाएगी और तू अपने पुरखाओं के संग सो जाएगा, तब मैं तेरे बाद तेरे वंश को, जो तेरे ही शरीर से उत्पन्न होगा, खड़ा करूँगा और उसके राज्य को स्थिर करूँगा। 13वह मेरे नाम के लिये एक भवन बनाएगा, और मैं उसके राज्य की राजगद्दी को सदा के लिये स्थिर रखूँगा। 14मैं उसका पिता ठहरूँगा, और वह मेरा पुत्र ठहरेगा। जब वह पाप करेगा, तब मैं उसे मनुष्यों की छड़ी से, और आदमियों के हाथों की मार से ताड़ना दूँगा, 15परन्तु मेरी वाचा की करुणा उससे कभी दूर न होगी, जैसा मैंने शाऊल से दूर किया, जिसे मैंने तेरे सामने से दूर किया। 16तेरा घराना और तेरा राज्य मेरे सामने सदा स्थिर बना रहेगा; तेरी राजगद्दी सदा के लिये स्थिर रहेगी।’”
17इन सब बातों और इस समस्त दर्शन के अनुसार नातान ने दाऊद को समाचार दिया।
दाऊद अपने परमपिता के सामने धन्यवाद देता है
18तब दाऊद राजा भीतर जाकर हमारे परमपिता के सामने बैठ गया, और कहने लगा: “हे प्रभु परमपिता, मैं कौन हूँ, और मेरा घराना क्या है, कि तूने मुझे यहाँ तक पहुँचाया? 19और हे प्रभु परमपिता, यह तेरी दृष्टि में छोटी बात ठहरी, कि तूने अपने दास के घराने के विषय में आने वाले बहुत दूर के समय की भी चर्चा की। हे प्रभु परमपिता, क्या मनुष्य जाति के साथ तेरा ऐसा ही व्यवहार है? 20दाऊद तुझसे और क्या कहे? क्योंकि हे प्रभु परमपिता, तू अपने दास को जानता है। 21अपने वचन के निमित्त और अपने ही मन के अनुसार, तूने यह सब बड़े-बड़े काम किए हैं, और उन्हें अपने दास पर प्रगट किया है। 22इसलिये हे प्रभु परमपिता, तू महान है। तेरे तुल्य कोई नहीं, और जो कुछ हमने अपने कानों से सुना है, उसके अनुसार तेरे सिवा कोई परमेश्वर नहीं। 23और तेरी प्रजा इस्राएल के तुल्य कौन है? वह तो पृथ्वी पर की एकमात्र ऐसी जाति है, जिसे छुड़ाने के लिये हमारे परमपिता ने जाकर उसे अपने लिये प्रजा बनाया, और अपने लिये नाम कमाया, और तेरे लिये बड़े और भयानक काम किए—अर्थात अपनी प्रजा के सामने से, जिसे तूने मिस्र से अपने लिये छुड़ाया, अन्यजातियों और उनके देवताओं को निकाल दिया। 24तूने अपनी प्रजा इस्राएल को सदा के लिये अपनी ही प्रजा ठहराया, और हे हमारे परमपिता, तू उनका पिता ठहरा।
25और अब, हे हमारे परमपिता, जो वचन तूने अपने दास और उसके घराने के विषय में कहा है, उसे सदा के लिये पूरा कर, और जैसा तूने प्रतिज्ञा की है वैसा ही कर। 26तेरा नाम सदा के लिये महान होगा, और लोग कहेंगे, ‘स्वर्ग की सेनाओं के परमपिता इस्राएल के ऊपर परमेश्वर हैं।’ और तेरे दास दाऊद का घराना तेरे सामने स्थिर रहेगा। 27क्योंकि हे स्वर्ग की सेनाओं के परमपिता, हे इस्राएल के परमेश्वर, तूने अपने दास पर यह प्रगट किया है: ‘मैं तेरा घराना बनाऊँगा।’ इसी कारण तेरे दास को तुझसे यह प्रार्थना करने का हियाव हुआ।
28और अब, हे प्रभु परमपिता, तू ही परमेश्वर है, और तेरे वचन सत्य हैं, और तूने अपने दास से इस भलाई की प्रतिज्ञा की है। 29इसलिये अब कृपा करके अपने दास के घराने पर आशीष दे, कि वह तेरे सामने सदा बना रहे। क्योंकि हे प्रभु परमपिता, तूने यह कहा है, और तेरी आशीष से तेरे दास का घराना सदा के लिये आशीषित रहेगा।”