दाऊद सन्दूक लाने के लिए निकलता है
6 1दाऊद ने एक बार फिर इस्राएल के सब चुने हुए पुरुषों को, अर्थात् तीस हज़ार को इकट्ठा किया। 2दाऊद अपने सब लोगों के साथ बाले-यहूदा से निकला, कि वहाँ से हमारे परमपिता का सन्दूक ले आए, जो उस नाम से पुकारा जाता है, अर्थात् स्वर्गीय सेनाओं के परमपिता के नाम से, जो करूबों पर विराजमान हैं। 3उन्होंने हमारे परमपिता का सन्दूक एक नई गाड़ी पर रखा, और उसे टीले पर बसे अबीनादाब के घर से ले आए; और अबीनादाब के पुत्र उज्जा और अह्यो उस नई गाड़ी को हाँक रहे थे, 4हमारे परमपिता का सन्दूक उस पर था, और अह्यो सन्दूक के आगे-आगे चल रहा था।
5दाऊद और समस्त इस्राएल का घराना हमारे परमपिता के सामने अपनी पूरी शक्ति से आनन्द मना रहे थे—गीतों, सारंगियों, वीणाओं, डफों, झाँझों और मँजीरों के साथ।
6जब वे नाकोन के खलिहान के पास पहुँचे, तब उज्जा ने हाथ बढ़ाकर हमारे परमपिता के सन्दूक को थाम लिया, क्योंकि बैल ठोकर खा गए थे। 7हमारे परमपिता का क्रोध उज्जा पर भड़क उठा; और उसकी ढिठाई के कारण परमपिता ने उसे वहीं मार डाला, और वह वहीं हमारे परमपिता के सन्दूक के पास मर गया। a a v7 हमारे परमपिता ने सन्दूक को ले जाने के लिए सावधानी से निर्देश दिए थे; यह दुखद घटना अपने लोगों के बीच उनकी पवित्र उपस्थिति के भार को प्रकट करती है, न कि ऐसे पिता को जो अपनी सन्तान को मारने के लिए उतावला हो। 8दाऊद को इस बात का बुरा लगा कि हमारे परमपिता ने उज्जा पर ऐसा प्रहार किया; और वह स्थान आज तक पेरेस-उज्जा कहलाता है। b b v8 पेरेस-उज्जा का अर्थ है “उज्जा पर टूट पड़ना” — वह स्थान वहाँ घटी घटना के कारण इसी नाम से पुकारा गया। 9उस दिन दाऊद हमारे परमपिता से डर गया, और कहने लगा, “हमारे परमपिता का सन्दूक मेरे पास कैसे आए?” 10इसलिए दाऊद ने हमारे परमपिता का सन्दूक अपने यहाँ दाऊदपुर में लाने से इनकार कर दिया, और उसे गती ओबेदेदोम के घर की ओर मोड़ दिया। 11हमारे परमपिता का सन्दूक गती ओबेदेदोम के घर में तीन महीने तक रहा, और हमारे परमपिता ने ओबेदेदोम और उसके समस्त घराने को आशीष दी।
12राजा दाऊद को यह बताया गया, “हमारे परमपिता ने सन्दूक के कारण ओबेदेदोम के घराने और उसकी समस्त सम्पत्ति को आशीष दी है।” तब दाऊद ने जाकर हमारे परमपिता के सन्दूक को ओबेदेदोम के घर से आनन्द के साथ दाऊदपुर में पहुँचाया।
13जब हमारे परमपिता के सन्दूक को उठानेवाले छह कदम चल चुके, तब दाऊद ने एक बैल और एक पाला हुआ बछड़ा बलि किया। 14तब दाऊद सनी का एपोद पहने हुए अपनी पूरी शक्ति से हमारे परमपिता के सामने नाचने लगा। c c v14 सनी का एपोद एक साधारण याजकीय वस्त्र था — आराधना के लिए उपयुक्त, परन्तु वह राजसी पोशाक नहीं जिसकी एक राजा से अपेक्षा की जाती है। 15इस प्रकार दाऊद और समस्त इस्राएल का घराना जयजयकार और नरसिंगों की ध्वनि के साथ हमारे परमपिता के सन्दूक को ले आए।
दाऊद के प्रति मीकल का तिरस्कार
16जब हमारे परमपिता का सन्दूक दाऊदपुर में प्रवेश कर रहा था, तब शाऊल की बेटी मीकल ने खिड़की से झाँककर राजा दाऊद को हमारे परमपिता के सामने उछलते और नाचते देखा—और उसने अपने मन में उसका तिरस्कार किया। 17वे हमारे परमपिता का सन्दूक भीतर ले आए, और उसे उसी स्थान पर, उस तम्बू के भीतर रखा जो दाऊद ने उसके लिए खड़ा किया था; और दाऊद ने हमारे परमपिता के सामने होमबलि और मेलबलि चढ़ाए। 18जब दाऊद होमबलि और मेलबलि चढ़ा चुका, तब उसने स्वर्गीय सेनाओं के परमपिता के नाम से लोगों को आशीष दी। 19और उसने समस्त लोगों को—अर्थात् इस्राएल की समस्त भीड़ को, क्या पुरुष क्या स्त्री, हर एक को—एक-एक रोटी, एक-एक खजूर की टिकिया, और एक-एक किशमिश की टिकिया बाँट दी। फिर सब लोग अपने-अपने घर लौट गए।
20जब दाऊद अपने घराने को आशीष देने के लिए लौटा, तब शाऊल की बेटी मीकल उससे मिलने के लिए निकल आई और कहने लगी, “इस्राएल के राजा ने आज कैसा अपना आदर बढ़ाया, जो अपनी प्रजा की दासियों की आँखों के सामने अपने को इस प्रकार उघाड़ता रहा, जैसे कोई ओछा मनुष्य निर्लज्जता से अपने को उघाड़ता है!”
21दाऊद ने मीकल से कहा, “यह तो हमारे परमपिता के सामने हुआ, जिसने तेरे पिता और उसके समस्त घराने के बदले मुझे चुन लिया, कि मुझे अपनी प्रजा का, अर्थात् इस्राएल का प्रधान ठहराए, जो हमारे परमपिता की प्रजा है। इसी कारण मैं उसके सामने आनन्द मनाऊँगा। 22मैं इससे भी अधिक अपने को तुच्छ करूँगा, और अपनी दृष्टि में छोटा बनूँगा; परन्तु जिन दासियों की तूने चर्चा की, उन्हीं की दृष्टि में मेरा आदर होगा।”
23और शाऊल की बेटी मीकल के मरने के दिन तक कोई सन्तान न हुई।