परमपिता मोआब पर विजय देते हैं
3 1यहूदा के राजा यहोशापात के राज्य के अठारहवें वर्ष में अहाब का पुत्र योराम सामरिया में इस्राएल पर राज्य करने लगा, और उसने बारह वर्ष तक राज्य किया। 2उसने हमारे परमपिता की दृष्टि में बुरा किया, तौभी अपने माता-पिता के समान नहीं; क्योंकि उसने बाल के उस पवित्र खम्भे को हटा दिया जो उसके पिता ने बनवाया था। 3फिर भी वह नबात के पुत्र यारोबाम के उन पापों से लिपटा रहा, जिनके द्वारा उसने इस्राएल से पाप कराया था; वह उनसे न फिरा।
4मोआब का राजा मेशा भेड़ें पालता था, और वह इस्राएल के राजा को एक लाख मेम्ने और एक लाख मेढ़ों की ऊन कर के रूप में देता था। 5परन्तु जब अहाब मर गया, तब मोआब के राजा ने इस्राएल के राजा से बलवा किया। 6तब राजा योराम उसी समय सामरिया से निकला और उसने समस्त इस्राएल की गिनती ली। 7उसने जाकर यहूदा के राजा यहोशापात के पास यह सन्देश भेजा: “मोआब के राजा ने मुझसे बलवा किया है। क्या तू मेरे साथ मोआब से युद्ध करने चलेगा?” उसने उत्तर दिया, “मैं चलूँगा। जैसा तू है वैसा ही मैं हूँ, मेरी प्रजा तेरी प्रजा के समान, और मेरे घोड़े तेरे घोड़ों के समान हैं।”
8उसने पूछा, “हम किस मार्ग से चढ़ाई करें?” उसने उत्तर दिया, “एदोम के जंगल के मार्ग से।”
9अतः इस्राएल का राजा, यहूदा के राजा और एदोम के राजा के साथ चला। वे घूमकर सात दिन तक कूच करते रहे, और न सेना के लिये और न उनके पीछे चलनेवाले पशुओं के लिये कहीं जल था। 10तब इस्राएल के राजा ने कहा, “हाय! हमारे परमपिता ने इन तीनों राजाओं को इसलिये बुलाया कि उन्हें मोआब के हाथ में कर दें।” a a v10 यह विश्वासहीन राजा, जो दोष लगाने में शीघ्र है, फिर भी वाचा के परिवार का ही है — वह उसी परमपिता का नाम लेता है जिस पर वह भरोसा नहीं करता।
11परन्तु यहोशापात ने कहा, “क्या यहाँ हमारे परमपिता का कोई भविष्यद्वक्ता नहीं है, कि उसके द्वारा हम हमारे परमपिता से पूछें?” इस्राएल के राजा के सेवकों में से एक ने उत्तर दिया, “शापात का पुत्र एलीशा यहाँ है, जो एलिय्याह के हाथों पर जल डाला करता था।”
12यहोशापात ने कहा, “हमारे परमपिता का वचन उसके पास है,” अतः इस्राएल का राजा, यहोशापात, और एदोम का राजा उसके पास गए।
13एलीशा ने इस्राएल के राजा से पूछा, “मेरा तुझसे क्या काम? अपने माता-पिता के भविष्यद्वक्ताओं के पास जा।” राजा ने कहा, “नहीं—हमारे परमपिता ने इन तीनों राजाओं को इसलिये बुलाया कि उन्हें मोआब के हाथ में कर दें।”
14एलीशा ने कहा, “स्वर्ग की सेनाओं के परमपिता के जीवन की शपथ, जिसकी मैं सेवा करता हूँ, यदि मैं यहूदा के राजा यहोशापात का आदर न करता, तो मैं न तेरी ओर देखता और न तुझ पर ध्यान देता। 15अब मेरे पास कोई बजानेवाला ले आओ।” जब बजानेवाले ने बजाया, तब हमारे परमपिता का हाथ उस पर आया।
16और उसने कहा, “हमारे परमपिता यों कहते हैं: इस घाटी में जगह-जगह गड्ढे खोदो। 17क्योंकि हमारे परमपिता यों कहते हैं: तुम न वायु देखोगे और न वर्षा, तौभी यह घाटी जल से भर जाएगी, और तुम पीओगे—तुम, तुम्हारे ढोर और तुम्हारे पशु। 18मेरी दृष्टि में यह तो छोटी बात है; वह मोआब को भी तुम्हारे हाथ में कर देंगे। 19तुम हर एक गढ़वाले नगर को और हर एक उत्तम नगर को मार लोगे, हर एक अच्छे वृक्ष को काट डालोगे, जल के हर एक सोते को बन्द कर दोगे, और हर एक अच्छे खेत को पत्थरों से बिगाड़ दोगे।”
20बिहान को, अन्नबलि चढ़ाने के समय, अचानक एदोम की दिशा से जल आया, और वह देश जल से भर गया।
21जब सारे मोआबियों ने सुना कि राजा उनसे युद्ध करने को चढ़ आए हैं, तब जितने हथियार बाँधने योग्य थे, और उनसे बड़े थे, वे सब बुलाकर इकट्ठे किए गए; और वे सीमा पर खड़े हो गए। 22वे सवेरे उठे; सूर्य जल पर चमक रहा था, और मोआबियों को अपने सामने का जल लहू के समान लाल दिखाई पड़ा। 23उन्होंने कहा, “यह तो लहू है! अवश्य राजाओं ने आपस में लड़कर एक दूसरे को मार डाला है। अब हे मोआबियो, लूट के लिये चलो!”
24परन्तु जब वे इस्राएल की छावनी के पास पहुँचे, तब इस्राएली उठे और उन्होंने मोआबियों को ऐसा मारा कि वे उनके सामने से भाग निकले। इस्राएली उनके देश में आगे बढ़ते गए और मोआबियों को मारते चले गए। 25उन्होंने नगरों को ढा दिया। हर एक अच्छे खेत में हर एक जन ने पत्थर फेंका, यहाँ तक कि वह पट गया। उन्होंने जल के हर एक सोते को बन्द कर दिया और हर एक अच्छे वृक्ष को काट डाला, केवल कीरहरासेत के पत्थर ही रह गए, जिसे गोफन चलानेवालों ने घेरकर उस पर आक्रमण किया। 26जब मोआब के राजा ने देखा कि युद्ध मेरे वश से बाहर है, तब उसने सात सौ तलवार चलानेवालों को साथ लिया कि एदोम के राजा तक मार्ग तोड़कर निकल जाए, परन्तु वह न कर सका। 27तब उसने अपने जेठे पुत्र को, जो उसके स्थान पर राज्य करनेवाला था, लेकर शहरपनाह पर होमबलि करके चढ़ाया। इस पर इस्राएल पर बड़ा क्रोध हुआ, अतः वे उसके पास से लौटकर अपने देश को चले गए।