अजर्याह परमपिता की ओर से एक वचन लाता है
15 1हमारे पिता का आत्मा ओदेद के पुत्र अजर्याह पर उतरा। 2वह आसा से भेंट करने के लिए निकला और उससे कहा, “हे आसा, और हे सारे यहूदा और बिन्यामीन, मेरी सुनो: जब तक तुम हमारे परमपिता के साथ रहोगे, तब तक वह तुम्हारे साथ रहेंगे। यदि तुम उन्हें ढूँढ़ोगे, तो वह तुम्हें मिलेंगे; परन्तु यदि तुम उन्हें त्याग दोगे, तो वह भी तुम्हें त्याग देंगे। 3बहुत समय तक इस्राएल हमारे परमपिता के बिना, सिखानेवाले याजक के बिना, और व्यवस्था के बिना रहा। 4परन्तु जब वे संकट में पड़े, तब वे हमारे परमपिता, इस्राएल के परमेश्वर की ओर फिरे, और उन्हें ढूँढ़ा, और वह उन्हें मिल गए। 5उन दिनों में न तो बाहर जानेवाला और न भीतर आनेवाला सुरक्षित था, क्योंकि देशों के सब निवासियों पर बड़ी घबराहट छा गई थी। 6जाति ने जाति को और नगर ने नगर को चूर-चूर कर डाला, क्योंकि हमारे परमपिता ने उन्हें हर प्रकार के संकट से व्याकुल कर दिया था। 7परन्तु तुम दृढ़ रहो; अपना साहस न छोड़ो, क्योंकि तुम्हारे काम का प्रतिफल मिलेगा।”
8जब आसा ने ये वचन, अर्थात् ओदेद भविष्यद्वक्ता की भविष्यद्वाणी सुनी, तब उसने हियाव बाँधा और यहूदा और बिन्यामीन के सारे देश से, और एप्रैम के पहाड़ी देश में अपने अधिकार किए हुए नगरों से घृणित मूरतों को दूर किया। और उसने हमारे परमपिता की उस वेदी की मरम्मत की जो उनके मन्दिर के द्वार के सामने थी। 9उसने सारे यहूदा और बिन्यामीन को, और एप्रैम, मनश्शे, और शिमोन में से उनके बीच रहनेवालों को इकट्ठा किया, क्योंकि इस्राएल में से बहुत से लोग यह देखकर कि हमारे परमपिता आसा के साथ हैं, उसके पास चले आए थे। 10आसा के राज्य के पन्द्रहवें वर्ष के तीसरे महीने में वे यरूशलेम में इकट्ठे हुए। 11उस दिन उन्होंने लूट में से हमारे परमपिता के लिए सात सौ बैल और सात हज़ार भेड़-बकरियाँ बलि कीं। 12उन्होंने वाचा बाँधी कि हम अपने सारे मन और सारे प्राण से हमारे परमपिता, अपने पूर्वजों के परमेश्वर को ढूँढ़ेंगे। 13और जो कोई हमारे परमपिता, इस्राएल के परमेश्वर को न ढूँढ़े, वह क्या छोटा, क्या बड़ा, क्या पुरुष, क्या स्त्री, मार डाला जाए। 14उन्होंने ऊँचे शब्द से जयजयकार के साथ, और तुरहियों और नरसिंगों के साथ हमारे परमपिता की शपथ खाई। 15सारे यहूदा ने उस शपथ के कारण आनन्द मनाया, क्योंकि उन्होंने अपने सारे मन से शपथ खाई थी, और अपनी सारी अभिलाषा से उन्हें ढूँढ़ा, और वह उन्हें मिल गए। और हमारे परमपिता ने उन्हें चारों ओर से विश्राम दिया।
16आसा राजा ने अपनी माता माका को भी राजमाता के पद से उतार दिया, क्योंकि उसने अशेरा के लिये एक घृणित मूरत बनाई थी; आसा ने उस मूरत को काट डाला, पीसकर चूर-चूर कर दिया, और किद्रोन नाले में जला दिया। 17यद्यपि ऊँचे स्थान इस्राएल में से दूर न किए गए, तौभी आसा का मन जीवन भर पूरी रीति से समर्पित बना रहा। a a v17 ऊँचे स्थान पहाड़ियों की चोटियों पर बने पूजा-स्थल थे, जहाँ बलि चढ़ाई जाती थी, प्रायः पराए देवताओं को। 18वह अपने पिता की अर्पित की हुई वस्तुएँ और अपनी स्वयं की अर्पित की हुई वस्तुएँ—चाँदी, सोना, और पात्र—हमारे परमपिता के भवन में ले आया। 19और आसा के राज्य के पैंतीसवें वर्ष तक कोई युद्ध न हुआ।