प्रभु का दिन आता है
5 1हे भाइयो और बहनो, अब समयों और कालों के विषय में तुम्हें कुछ लिखने की आवश्यकता नहीं। 2क्योंकि तुम स्वयं भली-भाँति जानते हो कि हमारे प्रभु यीशु का दिन ऐसे आता है जैसे रात में चोर आता है। 3जब लोग कहेंगे, “शान्ति है और कुछ भय नहीं,” तब उन पर अचानक विनाश आ पड़ेगा—जैसे गर्भवती स्त्री पर प्रसव-पीड़ा—और वे किसी रीति से न बच सकेंगे। 4परन्तु हे भाइयो और बहनो, तुम अन्धकार में नहीं हो कि वह दिन चोर के समान तुम पर आ पड़े। 5तुम सब तो ज्योति की सन्तान और दिन की सन्तान हो; हम न रात के हैं, न अन्धकार के। 6इसलिए हम औरों के समान न सोएँ, वरन् जागते और सचेत रहें। 7क्योंकि जो सोते हैं, वे रात ही को सोते हैं, और जो मतवाले होते हैं, वे रात ही को मतवाले होते हैं। 8परन्तु हम जो दिन के हैं, सचेत रहें, और विश्वास तथा प्रेम की झिलम पहनें, और उद्धार की आशा का टोप धारण करें। 9क्योंकि हमारे परमपिता ने हमें क्रोध के लिये नहीं, वरन् इसलिये ठहराया कि हम अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा उद्धार प्राप्त करें, 10जिसने हमारे लिये प्राण दिये, कि चाहे हम जागते रहें या सोते रहें, हम उसके साथ जीवित रहें। 11इसलिए एक दूसरे को उत्साहित करो और एक दूसरे की उन्नति करो, जैसा तुम कर भी रहे हो।
ज्योति की सन्तान के समान जीवन
12हे भाइयो और बहनो, हम तुमसे विनती करते हैं कि जो तुम्हारे बीच परिश्रम करते हैं, और प्रभु में तुम्हारी अगुवाई करते और तुम्हें चिताते हैं, उनका आदर करो। 13उनके काम के कारण प्रेम के साथ उन्हें अति महत्व दो। आपस में मेल-मिलाप से रहो।
14हे भाइयो और बहनो, हम तुम्हें समझाते हैं: आलसियों को चिताओ, निरुत्साहितों को ढाढ़स दो, निर्बलों को सम्भालो, सब के साथ धीरज धरो। 15सावधान रहो कि कोई किसी से बुराई के बदले बुराई न करे, वरन् एक दूसरे के लिये और सब के लिये सदा भलाई की खोज में लगे रहो।
16सदा आनन्दित रहो, 17निरन्तर प्रार्थना करते रहो, 18हर बात में धन्यवाद करो; क्योंकि तुम्हारे लिये मसीह यीशु में हमारे परमपिता की यही इच्छा है। 19पवित्र आत्मा को न बुझाओ। 20भविष्यद्वाणियों को तुच्छ न जानो, 21परन्तु सब बातों को परखो; जो भला है उसे थामे रहो। 22हर प्रकार की बुराई से दूर रहो।
23अब शान्ति के हमारे परमपिता स्वयं तुम्हें पूर्ण रीति से पवित्र करें, और तुम्हारी आत्मा, प्राण और देह हमारे प्रभु यीशु मसीह के आगमन के समय निर्दोष और सुरक्षित रखे जाएँ। 24जो तुम्हें बुलाता है वह विश्वासयोग्य है; वह निश्चय ही इसे पूरा करेगा।
25हे भाइयो और बहनो, हमारे लिये प्रार्थना करो।
26सब भाइयों और बहनों को पवित्र चुम्बन से नमस्कार करो। 27मैं तुम्हें प्रभु की शपथ देकर कहता हूँ कि यह पत्री सब भाइयों और बहनों को पढ़कर सुनाई जाए।
28हमारे प्रभु यीशु मसीह का अनुग्रह तुम्हारे साथ रहे।