पलिश्तियों के विरुद्ध हमारे परमपिता का हाथ
5 1पलिश्तियों ने हमारे परमपिता का संदूक छीन लिया था, और उसे एबेनेजेर से अशदोद ले आए। 2पलिश्तियों ने हमारे परमपिता के संदूक को लेकर दागोन के मन्दिर में पहुँचाया, और दागोन के पास रख दिया। 3जब अशदोद के लोग दूसरे दिन तड़के उठे, तो क्या देखा कि दागोन हमारे परमपिता के संदूक के सामने भूमि पर औंधे मुँह पड़ा है। तब उन्होंने दागोन को उठाकर फिर उसके स्थान पर खड़ा कर दिया। 4जब वे अगले दिन तड़के उठे, तो क्या देखा कि दागोन फिर हमारे परमपिता के संदूक के सामने भूमि पर औंधे मुँह गिरा पड़ा है। इस बार तो उसका सिर और दोनों हाथ टूटकर डेवढ़ी पर पड़े थे; केवल उसका धड़ ही बचा रह गया था। 5इसी कारण आज तक न तो दागोन के पुजारी और न ही अशदोद में दागोन के मन्दिर में आने वाला कोई जन दागोन की डेवढ़ी पर पाँव धरता है। 6हमारे परमपिता का हाथ अशदोद के लोगों पर भारी पड़ा। उसने उन्हें उजाड़ दिया और गिलटियों से मारा—अशदोद को और उसके चारों ओर के प्रदेश को भी। 7जब अशदोद के मनुष्यों ने यह देखा, तो कहने लगे, “इस्राएल के परमेश्वर का संदूक हमारे बीच नहीं रहना चाहिए; क्योंकि उसका हाथ हम पर और हमारे देवता दागोन पर कठोर पड़ा है।” 8अतः उन्होंने पलिश्तियों के सब सरदारों को बुलवाकर पूछा, “इस्राएल के परमेश्वर के संदूक के साथ हम क्या करें?” उन्होंने उत्तर दिया, “इस्राएल के परमेश्वर के संदूक को गत नगर में ले जाया जाए।” तब वे इस्राएल के परमेश्वर के संदूक को वहाँ ले गए।
9जब वे उसे वहाँ ले गए, तो हमारे परमपिता का हाथ उस नगर के विरुद्ध भी पड़ा, और वहाँ बहुत ही बड़ी घबराहट फैल गई। उसने उसके लोगों को क्या छोटे क्या बड़े मारा, और उनके शरीरों पर गिलटियाँ फूट निकलीं। 10इसलिए उन्होंने हमारे परमपिता के संदूक को एक्रोन भेज दिया। परन्तु जैसे ही वह पहुँचा, एक्रोन के लोग चिल्ला उठे, “वे इस्राएल के परमेश्वर के संदूक को हमारे पास ले आए हैं कि हमें और हमारे लोगों को मार डालें!”
11अतः उन्होंने पलिश्तियों के सब सरदारों को इकट्ठा करके कहा, “इस्राएल के परमेश्वर के संदूक को विदा करो; वह अपने स्थान पर लौट जाए, कि वह हमें और हमारे लोगों को न मार डाले।” क्योंकि सारे नगर में मृत्यु की घबराहट छा गई थी; वहाँ हमारे परमपिता का हाथ अत्यन्त भारी पड़ा था। 12और जो लोग मरे नहीं वे गिलटियों से मारे गए, और उस नगर की दोहाई आकाश तक पहुँची।