पढ़ें। ग्रहण करें। सुझाव दें।

♥ समीक्षाएँ

1 पतरस 4

पुस्तक

पिता की इच्छा के लिए कमर बाँधना

अध्याय 4।

सो, जब मसीह ने शरीर में दुःख उठाया, तो तुम भी उसी मनोभाव से अपने आप को शस्त्रयुक्त करो: क्योंकि जिसने शरीर में दुःख उठाया है, वह पाप से छूट गया। ताकि तुम अपने शरीर में शेष रहा हुआ समय फिर मनुष्यों की अभिलाषाओं के लिए नहीं, परन्तु हमारे परमपिता की इच्छा के लिए बिताओ। क्योंकि जो लोग परमपिता को नहीं जानते, उनकी इच्छा के अनुसार काम करते हुए तुम पहले ही बहुत समय बिता चुके हो: लुचपन, कुवासना, मतवालापन, रंगरलियाँ, पियक्कड़पन, और घृणित मूर्तिपूजा में जीवन बिताते हुए। इस पर वे अचम्भा करते हैं कि तुम अब उसी लीलाओं के बहाव में उनके साथ नहीं दौड़ते, इसलिए वे तुम्हारी निन्दा करते हैं। परन्तु उन्हें उसको लेखा देना होगा, जो जीवितों और मरे हुओं का न्याय करने के लिए तैयार है। इसी कारण उन्हें भी, जो अब मर चुके हैं, सुसमाचार सुनाया गया, ताकि वे शरीर में तो सब मनुष्यों की भाँति न्याय पाएँ, परन्तु आत्मा में हमारे परमपिता के समान जीवित रहें।

सब बातों का अन्त निकट है। इसलिए संयमी और सचेत रहो, ताकि तुम प्रार्थना कर सको। सबसे बढ़कर, एक दूसरे से गहरा प्रेम रखते रहो, क्योंकि प्रेम अनेक पापों को ढाँप देता है। बिना कुड़कुड़ाए एक दूसरे का अतिथि-सत्कार करो। जैसा जिसने वरदान पाया है, वैसे ही वह हमारे परमपिता के नाना प्रकार के अनुग्रह के भले भण्डारियों के समान उसे दूसरों की सेवा में लगाए। यदि कोई बोले, तो ऐसे बोले मानो हमारे परमपिता के वचन बोल रहा हो। यदि कोई सेवा करे, तो उस शक्ति से करे जो हमारे परमपिता देते हैं, ताकि सब बातों में यीशु मसीह के द्वारा हमारे परमपिता की महिमा हो। महिमा और सामर्थ्य युगानुयुग उसी की हैं। आमीन।

परमपिता के नाम में दुःख उठाना

हे प्रियो, जो अग्नि-परीक्षा तुम्हारी परख के लिए तुम पर आ पड़ी है, उससे यह समझकर अचम्भा न करो कि कोई अनोखी बात तुम पर हो रही है। वरन जैसे-जैसे तुम मसीह के दुःखों में सहभागी होते हो, वैसे-वैसे आनन्दित हो, ताकि जब उसकी महिमा प्रगट हो, तब तुम भी अति आनन्दित होकर मगन हो। यदि मसीह के नाम के लिए तुम्हारी निन्दा की जाती है, तो तुम धन्य हो, क्योंकि महिमा का आत्मा, अर्थात् हमारे पिता का आत्मा, तुम पर छाया रहता है। तुम में से कोई हत्यारा, या चोर, या कुकर्मी, या दूसरों के काम में हाथ डालनेवाला होकर दुःख न उठाए। परन्तु यदि कोई मसीही होने के कारण दुःख उठाए, तो लज्जित न हो, वरन इस बात के लिए हमारे परमपिता की स्तुति करे कि वह इस नाम को धारण करता है। क्योंकि वह समय आ पहुँचा है कि न्याय हमारे परमपिता के घराने से आरम्भ हो; और यदि वह हम ही से आरम्भ हो, तो उनका क्या अन्त होगा जो हमारे परमपिता के सुसमाचार को नहीं मानते? और, “यदि धर्मी ही कठिनता से उद्धार पाएगा, तो भक्तिहीन और पापी का क्या ठिकाना?” इसलिए जो हमारे परमपिता की इच्छा के अनुसार दुःख उठाते हैं, वे भला करते हुए अपने प्राणों को अपने विश्वासयोग्य सृजनहार के हाथ में सौंप दें।

A young man reading the Father's Heart Bible print edition in a coffee shop अब छपाई में

टिप्पणियाँ

इस अध्याय ने आपके मन में जो विचार, प्रश्न या शब्द जगाया — उसे यहाँ साझा करें। हर टिप्पणी आपका नाम योगदानकर्ताओं की दीवार पर जोड़ती है।

पढ़ना, सुनना, कॉपी करना और साझा करना सबके लिए खुला है — खाते की ज़रूरत नहीं। टिप्पणी करना, हाइलाइट करना और अपनी जगह याद रखना मुफ़्त खाते के साथ आते हैं, और हर टिप्पणी आपका नाम योगदानकर्ताओं की दीवार पर जोड़ती है।

परिवार में शामिल हों — यह मुफ़्त है →
  • अभी कोई टिप्पणी नहीं। अपनी आवाज़ जोड़ने वाले पहले बनें।